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प्रशासनिक लापरवाही से घाघरा में 03 गई जान-- बाढ़ पीड़ित_रिपोर्ट --घनश्याम तिवारी

 


धनघटा-- संतकबीर नगर।

स्थानीय तहसील क्षेत्र के घाघरा के उफान से हैसर व पौली ब्लॉक क्षेत्र में कुल 38 गांव में मैरून्ड हुए है। लेकिन प्रशासन सिर्फ 22 गांव ही मैरून्ड मान रहा है। क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक मासूम व दो बच्चियों समेत तीन की जान जा चुकी है। क्षेत्र के छठ्ठू खान, पप्पू ,राम प्रताप यादव ,रामानंद, लालचंद, भागीरथी, मनोहर, बासमती, कमलेश्वर, श्री राम प्रसाद समेत तमाम लोगों का कहना है कि क्षेत्र में जो नावें चल रही है ।उसको चलाने के लिए नाविको की व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते ग्रामीण ही नाव को चला रहे हैं। गत 5 अगस्त को सुजीत अपने साथ दो अन्य बच्चों के साथ नाव चला रहा था, जिससे नदी की गहराई में जाने के बाद नाव पलट गई।और वह डूब कर मर गया। यदि नाव को नाविक चलाया होता, तो सुजीत की जान नहीं गई होती। इसी क्रम में बाढ़ पीड़ितों ने अपना दु:ख बयां करते हुए कहा कि ग्रामीण बांस की फट्टी की नाव बनाकर नाव खुद चला रहे हैं। यदि प्रशासन ने भरपूर नाव की व्यवस्था किया होता 6 जून को दो मासूम बच्चियों की जान नहीं गई होती। नाव के अभाव के चलते 8 वर्षीय शांती व 10वर्षीय ज्योति की जान चली गई । नाव न रहने के चलते दोनों बच्चियां घर से पैदल ही निकल गई। जिससे बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। इस संबंध में पूछे जाने पर एसडीएम धनघटा प्रमोद कुमार ने बताया कि प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों के मदद के लिए सभी तैयारियां परी कर ली गयी है।पीड़ितो के लिए प्रशासन ने 45 नावों की व्यवस्था कर दिया है। इसके सहारे बाढ़ पीड़ित अपनी सुरक्षा को देखते हुए आने, जाने की व्यवस्था करें।रह गयी बात नाविकों की, तो शीघ्र सभी नावों पर नाविको की ब्यवस्था कर दिया जायेगा।

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