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आवश्यकता है

इस्तेमाल की गयी पीपीई किट से संक्रमण का खतरा, करें पीली डस्टबिन का प्रयोग_रवि गुप्त

 


-सीएमओ ने अस्पतालों को पीपीई किट के समुचित निस्तारण के दिये निर्देश


-जिले के जिला मेमोरियल चिकित्सालय व जवाहर नवोदय विघालय में चल रहा एल वन हास्पिटल
बलरामपुर, 08 अगस्त। कोविड-19 के खिलाफ जंग में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों, अस्पतालों व अन्य कार्यस्थलों के स्टाफ को सुरक्षित बनाने में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई किट) की बड़ी भूमिका है, बशर्ते इसके इस्तेमाल के बाद सही तरीके से निस्तारण किया जाए। इस्तेमाल के बाद इधर-उधर खुले में छोड़ देने से संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। अस्पतालों, एम्बुलेंस और यहाँ तक कि श्मसान घाटों तक पर खुले में फेंकी गयी पीपीई किट के बारे में चिकित्सकों का साफ कहना है कि ऐसा करके हम खुद को बचा नहीं रहें हैं बल्कि अपने साथ ही दूसरों को भी मुश्किल में डालने का काम कर रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. घनश्याम सिंह ने शनिवार को बताया कि इस्तेमाल की गयी पीपीई किट से करीब दो दिन तक संक्रमण का पूरा खतरा बना रहता है। इसलिए किट के साथ का मास्क हो या गाउन उसको कभी इधर-उधर न फेंके बल्कि उसके लिए निर्धारित पीली डस्टबिन में ही डालें। सभी सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को भी चाहिए कि इस बायो मेडिकल वेस्ट (अस्पताल के कचरे) के निस्तारण की व्यवस्था दुरुस्त रखें। सीएमओ का कहना है कि ऐसा देखने में आया है कि कुछ लोग किट को इस्तेमाल के बाद इधर-उधर फेंक देते हैं जो कि बहुत ही गंभीर मामला है। ऐसे लोगों के खिलाफ तो आपदा अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इससे जहां एक ओर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, वही दूसरी ओर इसका सीधे तौर पर पर्यावरण पर भी असर पड़ता है, जो कि लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। कुछ अस्पतालों ने वैसे इस काम को एजेंसियों के जिम्मे कर रखा है, जिन्होने कचरे का निस्तारित करने के लिए इन्सीनरेटर मशीन लगा रखी हैं, यहां पर इसका समुचित निस्तारण होता है ताकि किसी तरह के प्रदूषण का खतरा न रहे। कुछ प्राइवेट अस्पताल चोरी छिपे बायो मेडिकल वेस्ट को इधर उधर फेंक रहे हैं, ऐसे अस्पतालों की सूचना मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिले के लेवल वन अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ को पीपीई किट के समुचित निस्तारण के भी निर्देश दिये गये हैं।
कोरोना वायरस के नोडल अफसर डा. ए.के. सिंघल का कहना है कि पीपीई किट के इस्तेमाल और निस्तारण लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बाकायदा गाइड लाइन जारी की है कि पीपीई किट के इस्तेमाल और निस्तारण में किस तरह से सावधानी बरतनी है। उसके मुताबिक ही इसके निस्तारण में सभी की भलाई है। डा. सिंघल का कहना है कि जिले में इस समय रोजाना दर्जनों पीपीई किट का इस्तेमाल हो रहा है और यह एक बार ही इस्तेमाल के लिए हैं। इसलिए इस्तेमाल के बाद इसको मशीन के जरिये ही नष्ट किया जाना सबसे उपयुक्त तरीका उन्होने बताया कि अगर कोई भी पीपीई किट को इस्तेमाल के बाद इधर-उधर खुले में फेंक देगा तो उसका यह कृत्य इस लड़ाई को कमजोर बना सकता है। इसलिए खुद के साथ दूसरों को भी सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है कि एक जिम्मेदार नागरिक की भांति इस्तेमाल के बाद किट को ढक्कन बंद डस्टबिन में ही डालें।
-पीपीई किट में क्या-क्या है शामिल
इस किट में सिर से पाँव तक को पूरी तरह से कवर करने का पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें सिर को ढकने के लिए कैप, गागल्स, फेस शील्ड, ट्रिपल लेयर मास्क, ग्लव्स, गाउन (एप्रन के साथ व एप्रन के बिना दोनों तरह से) और शू कवर शामिल हैं। इसमें से कोई भी चीज को इस्तेमाल के बाद खुले में फेंकने पर पूरी तरह से मनाही है, क्योंकि इसके संपर्क में आने से कोई भी संक्रमण की जद में आ सकता है ।

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