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जगदीशपुर-अमेठी--जगदीशपुर क्षेत्र के अन्तर्गत रानीगंज कस्बे के फैजाबाद रोड पर ज्येष्ठ माह के चौथे मंगल के अवसर पर प्रसाद 

जिसमें पूङी-सब्जी व बूँदी का वितरण किया। भीषण गर्मी में भक्तो ने जमकर प्रसाद का आनंद उठाया।
कार्यक्रम का नेतृत्व डा.प्रदीप तिवारी व डा. प्रज्ञा वाजपेयी ने
बजरंग बली के चित्र पर माल्यार्पण किया व धूप बत्ती जलाकर पूजन किया। वहीं भक्तो को अपने हाथो से प्रसाद वितरण करके कार्यक्रम शुभारंभ किया।
और कहाकि इसी तरह से भण्डारे का आयोजन होता रहेगा। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओ के सहयोग व समय देने के लिए के लोगों को धन्यवाद भी दिया।
इस मौके पर भाजपा नेता प्रदीप सिंह, अजय नरायन त्रिपाठी , महेन्द्र प्रताप सिंह , जितेन्द्र सिंह, गौरव मिश्रा आदि लोग उपास्थि रहे।

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मुकद्दस माह रमजानुल मुबारक का आखिरी अशरा चल रहा है यह आखिरी अशरा बहुत फजीलत और रहमत तथा बरकतों वाला है ।इस अशरा में गुनाहों से माफी मांगने,मगफिरत व जहन्नम से निजात पाने का मौका है। इस अशरे की सबसे बडी फजीलत यह है कि इसमें एक रात शबे कद्र की है जिसकी इबादत सत्तर हजार रातों की इबादत पर भारी है इसलिए इस रात को हर कोई पूरी रात जागकर बारगाहे ईलाही में अपने गुनाहों से तौबा करने के साथ ही अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआ करते हैं ।शबे कद्र की इस रात को लैलुतलकद्र भी कहा जाता है इसी पाक एवं मुकद्दस रात में कुराने करीम नाजिल हुई थी इस रात सिर्फ रहमतों की बारिश होती है और पूरी रात मुसलमान अपने गुनाहों से माफी मागंकर खुदा को राजी करता है वैसे तो इस मुकद्दस माह में हर रात और दिन काफी रहमतों और बरकतों वाला है लेकिन इस माह की सबसे अफजल रात शब- ए-कद्र की रात है ।
ब्लाक प्रमुख सेमरियावां मुमताज अहमद ने बताया कि इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बहुत ही बुलंद होते हैं। गुनाह बख्श दिए जाते हैं। दोजख की आग से निजात मिलती है।उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है। ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियां नामे-आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की विशेष रात में इबादत, तिलावत और दुआएं कुबूल व मकबूल होती हैं।

अल्लाह ताअला की बारगाह में रो-रोकर अपने गुनाहों की माफी तलब करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात खुदा ताअला नेक व जायज तमन्नाओं को पूरी फरमाता है। रमजान की विशेष नमाज तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज साहबान इसी शब में कुरआन मुकम्मल करते हैं, जो तरावीह की नमाज अदा करने वालों को सुनाया जाता है। इसके साथ घरों में कुरआन की तिलावत करने वाली मुस्लिम महिलाएं भी कुरआन मुकम्मल करती हैं।प्रमुख मुमताज ने मुसलमानों से इस दौरान गरीब और मजलूमों की मदद करने की बात कही उन्होंने कहा इस ईद में नये कपडे न खरीदें बल्कि उस पैसे से गरीबों और यतीमों की दिल खोलकर मदद करें ऐसे कार्यों का सिला खुदा हर हाल में अपने बंदों को देते हैं

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संतकबीरनगर--- पाक एवं मुकद्दस माह रमजानुल मुबारक का आखिरी अशरा चल रहा है जो कि बहुत फजीलत और रहमत तथा बरकतों वाला है ।यह आखिरी अशरा गुनाहों से माफी मांगने,मगफिरत व जहन्नम से निजात पाने वाला है इस अशरे की सबसे बडी खाशियत यह है कि इसमें एक रात शबे कद्र की है जिसकी इबादत सत्तर हजार रातों की इबादत पर भारी है इसलिए इस रात को हर कोई पूरी रात जागकर बारगाहे ईलाही में अपने गुनाहों से तौबा करने के साथ ही अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआ करते हैं ।शबे कद्र की इस रात को लैलुतलकद्र भी कहा जाता है इसी पाक एवं मुकद्दस रात में कुराने करीम नाजिल हुई थी इस रात सिर्फ रहमतों की बारिश होती है और पूरी रात मुसलमान अपने गुनाहों से माफी मागंकर खुदा को राजी करता है वैसे तो इस मुकद्दस माह में हर रात और दिन काफी रहमतों और बरकतों वाला है लेकिन इस माह की सबसे अफजल रात शब- ए-कद्र की रात है ।
मौलाना फुजैल अहमद नदवी ने बताया कि इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बुलंद होते हैं। गुनाह बख्श दिए जाते हैं। दोजख की आग से निजात मिलती है।उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है। ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियां नामे-आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की विशेष रात में इबादत, तिलावत और दुआएं कुबूल व मकबूल होती हैं।

अल्लाह ताअला की बारगाह में रो-रोकर अपने गुनाहों की माफी तलब करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात खुदा ताअला नेक व जायज तमन्नाओं को पूरी फरमाता है। रमजान की विशेष नमाज तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज साहबान इसी शब में कुरआन मुकम्मल करते हैं, जो तरावीह की नमाज अदा करने वालों को सुनाया जाता है। इसके साथ घरों में कुरआन की तिलावत करने वाली मुस्लिम महिलाएं भी कुरआन मुकम्मल करती हैं।

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●शीलू ने रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे" गीत के माध्यम से बांधा समा।

●खोगिये में बिटिया के मारा जन् माई" गीत के माध्यम से सर्व समाज को भ्रूण हत्या बन्द करने एवम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दिया सन्देश।

●शीलू ने "वैष्णव जन् तो तेरे कहिए पीर पराई जाने रे" गीत के माध्यम से पर पीड़ा को किया प्रदर्शित

संतकबीरनगर--अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद संत कबीर नगर के द्वारा फेसबुक लाइव के माध्यम से सांस्कृतिक संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थी परिषद सन्त कबीर नगर विशेष आमंत्रण पर लखनऊ दूरदर्शन की गायिका शीलू श्रीवास्तव ने प्रस्तुति दी। शीलू श्रीवास्तव ने अपने लाइव सेशन की शुरुआत वाणी वंदना से की ततपश्चात उन्होंने गुरु वंदना के माध्यम से गुरुओ को नमन किया। इसके बाद उन्होंने लोकगीत जिसमे कजरी, चैती आदि तमाम विधाओं के गीत प्रस्तुत किया। शीलू ने "वैष्णव जन् तो तेरे कहिए पीर पराई जाने रे" गीत के माध्यम से पर पीड़ा की अभिव्यक्ति की। इसके साथ ही "रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे" गीत के माध्यम से बांधा समा। इस तरह विभिन्न विधाओं के गीत प्रस्तुत कर शीलू ने वाहवाही प्राप्त की। अंतिम में "खोगिये में बिटिया के मारा जन् माई" गीत के माध्यम से सर्व समाज को भ्रूण हत्या बन्द करने एवम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दिया सन्देश।
इस live सेशन में प्रान्त के संगठन मंत्री आनंद गौरव, प्रदेश सहमंत्री अजय दुबे, तहसील प्रमुख माधवेन्द्र तिवारी, रीतेश श्रीवास्तव, हर्ष सिंह, सौरभ पाण्डेय, अरविंद चौधरी, सीमा सिंह, आदि तमाम लोग उपस्थित रहे।

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●जीवन में आध्यात्मिक आनंद तथा उन्नति प्राप्ति में सहायक है सहज योग

●सहज योग रोग प्रतिकारक क्षमता के विकास में है सहायक

●लॉक डाउन में सहजयोगी कर रहे है ऑनलाइन ध्यान
●ऑनलाइन माध्यमो से 50 देशों के लगभग 2 लाख लोग कर रहे है ध्यान

आज संपूर्ण विश्व कोरोना नामक वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। चारो तरफ निराशा का माहौल व्याप्त है। उपचार के कोई भी संसाधन उपलब्ध नही है। ऐसी स्थिति में दुनिया के कई देशों ने यह स्वीकार भी किया है कि इस विषाणु से निजात पाने हेतु ध्यान और आध्यात्म महत्वपूर्ण साबित हो सकते है। इस प्रक्रिया में सहज योग जो दुनिया के लगभग 140 देशों में पूर्णतः निःशुल्क संचालित होता है। इस लॉक डाउन के दौरान भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में फैले अपने साधको के लिए आनलाइन ध्यान की प्रक्रिया से जोड़ने का एक सफल प्रयोग किया है। यह जानकारी देते हुए "निर्मला देवी सहज योग ट्रस्ट" सन्त कबीर नगर के जिला समन्वयक माधवेन्द्र तिवारी ने बताया कि लॉक डाउन के बाद भी अपने साधको के सामूहिक ध्यान को नियमित करने हेतु ऑनलाइन ध्यान संचालित किया गया है। इस ऑनलाइन ध्यान कार्यक्रम का संचालन परम् पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल "प्रतिष्ठान पुणे" के माध्यम से किया जा रहा है। यूट्यूब लाइव के साथ ही "इंडिया सहजयोग फेसबुक पेज" एवम "मिक्सलर रेडियो" पर भी लाइव कार्यक्रम प्रसारित किया जा रहा है। सभी साधक प्रातः ध्यान हेतु सुबह 5:30 बजे एवम सायं काल ध्यान 7 बजे इन विभिन्न सोशल मीडया के माध्यम से कर सकते है। आगे बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सहज योग एक सूक्ष्म एवं जीवन्त क्रिया है। जिसमें शरीर के अंदर की शक्ति का योग प्रकृति में व्याप्त परमात्मा की प्रेम शक्ति से हो जाता है और हमारे अंदर परमात्मा की शक्ति चैतन्य के रूप में बहने लगती है और हम परमात्मा से जुड़ जाते हैं। इसी घटना को आध्यात्मिक जगत में योग कहते हैं। इस क्रिया की खोज परम पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी ने किया था। सहज योग के माध्यम से मानव जीवन में व्याप्त चिंता क्रोध तनाव कम होने लगते हैं। एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास होने लगता है। लोग विभिन्न प्रकार की कुप्रवृत्तियों से छुटकारा पाने लगते हैं तथा जीवन में आध्यात्मिक आनंद तथा उन्नति प्राप्त होने लगता है। इसका आनंद सभी धर्मों के लोग प्राप्त कर सकते हैं यह क्रिया नियमित ध्यान धारणा से संभव है। यह कुण्डलिनी जागरण पर आधारित है। कुण्डलिनी सभी मानव के अंतर व्याप्त है इनमें सात ऊर्जा के केंद्र है जिसे हम सात चक्र की संज्ञा देते है। शरीर के अंदर किसी भी प्रकार का विकार उत्पन्न होने का अर्थ है कि इन ऊर्जा केंद्रो अथवा चक्रों में विकार उत्पन्न होना। अतः इसे ध्यान और धारणा से संतुलन की स्थिति बनाते हुए विभिन्न्न समस्याओ का निराकरण किया जा सकता है। इस प्रकिया से व्यक्ति तनाव एवम सभी प्रकार की चिंता से मुक्त होकर एक अलग प्रकार के आनन्द की अनुभूति करता है जिसे आध्यत्मिक भाषा में परमानन्द कहते है। इस प्रक्रिया से व्यक्ति के अंदर रोग प्रतिकारक क्षमता का विकास होता है। जो इस महामारी में लोगो के लिए सहायक है। इस लॉक डाउन के समय में सोशल मीडिया एवं प्रौद्योगिकी का सकारात्मक उपयोग करते हुए विश्व के लोगों का एक साथ सामूहिकता में ध्यान करना उनके शारीरिक,मानसिक,स्वाथ्य को सुनिश्चित करने के साथ साथ तनाव एवम चिंता से मुक्त रखने में सहायक सिद्ध हो रहा है। ट्रस्ट द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार इस लॉक डाउन के दौरान अब तक लगभग 50 देशों के 2 लाख से अधिक लोगो ने सहज योग ध्यान के ऑनलाइन सत्र में सामूहिकता में ध्यान किया। अपने जिले के सैकड़ो साधक घर बैठे ही इसका लाभ प्राप्त कर रहे है। नए साधक हमारे टोल फ्री नम्बर 180030700800 पर फोन करके इस ध्यान से निःशुल्क जुड़ सकते है।

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सेमरियावां।संतकबीरनगर
त्रासदी आपदा के रूप में स्थापित हो चुका नोवल कोरोना वायरस लगभग 200 से अधिक देशों में फैल चुका हैं और अब यह संक्रमण धीरे-धीरे भारत में भी अपना पांव पसारता जा रहा है। इस वायरस के संकट से पुरी दुनिया के लोग प्रभावित हैं। इससे बचाव के लिए देश में लाकडाउन कर दिया गया हैं। लॉकडाउन टू में मुसलमानों के लिए खैर व बरकत का महीना माह रमजान कल से शुरू हो रहा हैं। इस पवित्र माह में लोग दिन व रात अल्लाह की इबादत में व्यस्त रहते हैं।पूरे महीने सेहरी, रोजा,अफतार, दुआ,खैरात, पांचों वक़्त की नमाज के साथ रात में विशेष नमाज अदा की जाती है। कोविड-19 को देखते हुए माहे रमजान में इस्लामिक विद्वानों ने जो गाइड लाइन बनायी हैं उसे क्षेत्र के मुस्लिम धर्म गुरु व बुद्ध जीवियों ने सभी लोगो से पालन करने का आह्वान किया हैं।


मौलाना शोएब अहमद नदवी ने कहा कि पवित्र माहे रमजान की आमद पर पूरे देश में 40 दिन के लॉकडाउन के चलते माहे रमजान के लिए देश के इस्लामिक विद्वानों,मुस्लिम तनजीमों,प्रसिद्ध दीनी इदारों ने केंद्र व प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के पालन हेतु पवित्र माहे रमजान के लिए विशेष एहतियात बरतने और कोविड 19 के बचाव के नियमो के पालन करने की हैं। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन का इस महामारी से बचाव में सहयोग की अपील की है।

मदरसा तालीमुल क़ुरआन सेमरियावा के मोहतमिम मौलाना मुनीर अहमद नदवी ने कहा कि चांद देखने के लिए भीड़ न लगाएं,पटाखा न फोड़ें,घर से बाहर न निकलें।
देश के मशहूर उलमाए कराम की हिदायत के अनुसार पांचों वक़्त की नमाज,नमाजे जुमा व विशेष माहे रमजान महीने में अदा की जाने वाली नमाजे तरावीह लॉक डाउन के चलते घरों में ही अदा करें।मस्जिद आने का प्रयास न करें।मस्जिद में भीड़ न लगाएं। धारा 144 का पालन करते हुए मस्जिद में सिर्फ इमाम मो अज्जिन व खादिम सीमित संख्या में नमाज अदा करें।पांच से अधिक कदापि न हों।वह भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण पालन करते हुए। मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए कदापि जिद न करें।

मौलना मुजीबुर्रहमान कासमी ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते घरों में नमाज पढ़ने पर मसजिद ही का सवाब मिलेगा।
इस्लामी विद्वानों ने ऐलान किया है कि इस बार माहे रमजान में अफ़तार पार्टी का आयोजन न करें।मस्जिदों में भी आफ्तार हेतु भीड़ न करें। अफ्तार की खरीदारी के लिए बाजार में भीड़ न लगाएं।बच्चों को बाजार न भेजें। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन द्वारा निश्चित किए गए समय में ही खरीदारी करें। अफ्तार पार्टी के आयोजन के बजाए जरूरतमंदों और मदरसों की आर्थिक मदद, दान ,सदका और जकात अदा करें।

मदनी मस्जिद इस्लामाबाद के इमाम ने कहा कि माहे रमजान में लाक डाउन के नियमों के पालन के तहत समाजी दूरी बनाए रखने, भीड़ से बचने के लिए अपने अपने घरों को मस्जिद बनाएं। दिन रात इबादत करें, नफिल नमाज पढ़े, पवित्र क़ुरआन की तिलावत करें।कुछ कमी हो तो सबर करें।

जिला पंचायत सदस्य मो अहमद ने युवा वर्ग से अपील किया है कि अफ्तारी के बाद सायं अनावश्यक न घूमें।दुकानें बन्द हैं।अपने अपने घरों में सुरक्षित रहें।गार्जियन बच्चों पर कंट्रोल करें।मोबाइल पर कीमती वक़्त बरबाद न करें।

शिक्षक जफीर अली करखी ने कोविड 19 के संकट से सभी देशवासी फिक्रमंद हैं।इससे बचने का सबसे आसान तरीका घर में रहें सुरक्षित रहें।अफवाह से बचें।लोगों को भीड़ से बचने हेतु प्रेरित करें।इस महामारी से बचाव हेतु जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को पूरा सहयोग दें।इस बरकत वाले महीने कोरोना मुक्त हेतु अल्लाह से दुआ मांगे।

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रमजान पर विशेष- पाक माह रमजान कल से शुरू हो रहा है जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं इस मुकद्दस माह का इंतेजार मुसलमानों को पूरे वर्ष रहता है लेकिन इस बार कोरोना जैसी महामारी की वजह से पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है एक माह तक होने वाली तरावीह की नमाज भी इस बार नहीं होगीं गुलजार रहने वाली मस्जिदें इसबार सुनसान रहेगीं ।जिसको लेकर लोग परेशान भी हैं लेकिन इस महामारी से निपटने के लिए मुसलमान लाकडाउन का पालन करें और घरों में खूब इबादत कर बारगाहे ईलाही कोरोना जैसी वबा से निजात के लिए दुआ करें ताकि पूरी दुनिया सुरक्षित रहे।

हदीस में आता है कि माहे रमज़ानुल मुबारक में नेकियों का अज्र बहुत बढ़ जाता है लिहाज़ा कोशिश कर के ज्‍़यादा से ज्‍़यादा नेकियां इस माह में जमा कर लेनी चाहियें।
माहे रमज़ान में एक दिन का रोज़ा रखना एक हज़ार दिन के रोज़ों से अफ़्ज़ल है और माहे रमज़ान में एक मरतबा तस्बीह़ करना (यानी कहना) इस माह के इ़लावा एक हज़ार मरतबा तस्बीह़ करने (यानी ) कहने से अफ़्ज़ल है और माहे रमज़ान में एक रक्अ़त पढ़ना गै़रे रमज़ान की एक हज़ार रक्अ़तों से अफ़्ज़ल है।

अमीरुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते सय्यिदुना उ़मर फ़ारूक़े आज़म रजि से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: (तर्जमा) “रमज़ान में जि़क्रुल्लाह करने वाले को बख़्श दिया जाता है और इस महीने में अल्लाह तआला से मांगने वाला मह़रूम नहीं रहता।”

जो खु़श नस़ीब मुसल्मान माहे रमज़ान में इन्तिक़ाल करता है उस को सुवालाते क़ब्र से अमान मिल जाती, अ़ज़ाबे क़ब्र से बच जाता और जन्नत का ह़क़दार क़रार पाता है। “जो मो’मिन इस महीने में मरता है वो सीधा जन्नत में जाता है, गोया उस के लिये दोज़ख़ का दरवाज़ा बन्द हो जाता है।
ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने मस्ऊ़द रजि से रिवायत है, हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जिस को रमज़ान के इखि़्तताम के वक़्त मौत आई वो जन्नत में दाखि़ल होगा और जिस की मौत अ़रफ़ा के दिन (यानी 9 ज़ुल हि़ज्जतुल ह़राम) के ख़त्म होते वक़्त आई वो भी जन्नत में दाखि़ल होगा और जिस की मौत स़दक़ा देने की ह़ालत में आई वो भी दाखि़ले जन्नत होगा।”


उम्मुल मुअ्मिनीन सय्यि-दतुना आइशा सि़द्दीक़ा रजि से रिवायत है, हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जिस का रोज़े की ह़ालत में इन्तिक़ाल हुआ, अल्लाह उस को कि़यामत तक के रोज़ों का स़वाब अ़त़ा फ़रमाता है।”
रोज़ादार किस क़दर नस़ीबदार है कि अगर रोज़़े की ह़ालत में मौत से हम-कनार हुआ तो कि़यामत तक के रोज़़ों के स़वाब का ह़क़दार क़रार पाएगा।

ह़ज़रते सय्यिदुना अनस बिन मालिक फ़रमाते हैं कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “यह रमज़ान तुम्हारे पास आ गया है, इस में जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे़ बन्द कर दिये जाते हैं और शयात़ीन को कै़द कर दिया जाता है, मह़रूम है वो शख़्स़ जिस ने रमज़ान को पाया और उस की मगि़्फ़रत न हुई कि जब इस की रमज़ान में मगि़्फ़रत न हुई तो फिर कब होगी।

माहे रमज़ान तो क्या आता है रह़मत व जन्नत के दरवाजे़ खुल जाते हैं ।दोज़ख़ को ताले पड़ जाते और शयात़ीन क़ैद कर लिये जाते हैं। चुनान्चे ह़ज़रते सय्यिदुना अबू हुरैरा रजि फ़रमाते हैं कि हुज़ूरे अकरमﷺ अपने स़ह़ाबए किराम को ख़ुश ख़बरी सुनाते हुए इर्शाद फ़रमाते हैं “रमज़ान का महीना आ गया है जो कि बहुत ही बा बरकत है। अल्लाह तआला ने इस के रोज़े तुम पर फ़र्ज़ किये हैं, इस में आस्मान के दरवाजे़ खोल दिये जाते हैं। और जहन्नम के दरवाज़े बन्द कर दिये जाते हैं। सरकश शैत़ानों को क़ैद कर लिया जाता है। इस में अल्लाह तआला की एक रात शबे क़द्र है, जो हज़ार महीनों से बढ़ कर है जो इस की भलाई से मह़रूम हुआ वोही मह़रूम है।”
जब रमज़ान आता है तो आस्मान के दरवाजे़ खोल दिये जाते हैं।
रिवायात में आता है कि जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और दोज़ख़ के दरवाज़े बन्द कर दिये जाते हैं शयात़ीन जन्ज़ीरों में जकड़ दिये जाते हैं। एक रिवायत में है कि रह़मत के दरवाजे़ खोले जाते हैं।


कि माहे रमज़ान में आसमानों के दरवाज़े भी खुलते हैं जिन से अल्लाह की ख़ास़ रहमतें ज़मीन पर उतरती हैं और जन्नतों के दरवाज़े भी जिस की वजह से जन्नत वाले हू़रो गि़ल्मान को ख़बर हो जाती है कि दुनिया में रमज़ान आ गया और वो रोज़ा दारों के लिये दुआओं में मश्ग़ूल हो जाते हैं।

माहे रमज़ान में व
दोज़ख़ के दरवाजे़ ही बन्द हो जाते हैं जिस की वजह से इस महीने में गुनहगारों बल्कि काफि़रों की क़ब्रों पर भी दोज़ख़ की गरमी नहीं पहुंचती। वो जो मुसलमानों में मश्हूर है कि रमज़ान में अ़ज़ाबे क़ब्र नहीं होता इस का येही मत़लब है और ह़क़ीक़त में इब्लीस मअ़ अपनी जु़िर्रय्यतों (यानी औलाद) के क़ैद कर दिया जाता है। इस महीने में जो कोई भी गुनाह करता है वो अपने नफ़्से अम्मारा की शरारत से करता है न शैत़ान के बहकाने से।


रमज़ानुल मुबारक में हमारी मसाजिद ग़ैरे रमज़ान के मुक़ाबले में ज्‍़यादा आबाद हो जाती हैं। नेकियां करने में आसानियां रहती हैं और इतना ज़रूर है कि माहे रमज़ान में गुनाहों का सिल्सिला कुछ न कुछ कम हो जाता है।

ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने अ़ब्बास रजि से मरवी है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “बेशक जन्नत माहे रमज़ान के लिये एक साल से दूसरे साल तक सजाई जाती है, पस जब माहे रमज़ान आता है तो जन्नत कहती है, “ऐ अल्लाह! मुझे इस महीने में अपने बन्दों में से (मेरे अन्दर) रहने वाले अ़त़ा फ़रमा दे।” और हू़रेई़न कहती हैं, “ऐ अल्लाह! इस महीने में हमें अपने बन्दों में से शौहर अ़त़ा फ़रमा” फिर सरकारे मदीना ने इर्शाद फ़रमाया, “जिस ने इस माह में अपने नफ़्स की हि़फ़ाज़त की कि न तो कोई नशा आवर शय पी और न ही किसी मो’मिन पर बोहतान लगाया और न ही इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह हर रात के बदले इस का सौ ह़ूरों से निकाह़ फ़रमाएगा और उस के लिये जन्नत में सोने, चांदी, याकू़त और ज़बरजद का ऐसा मह़ल बनाएगा कि अगर सारी दुनिया जम्अ़ हो जाए और इस मह़ल में आ जाए तो इस मह़ल की उतनी ही जगह घेरेगी जितना बकरियों का एक बाड़ा दुनिया की जगह घेरता है और जिस ने इस माह में कोई नशा आवर शय पी या किसी मो’मिन पर बोहतान बांधा या इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह उस के एक साल के आ’माल बरबाद फ़रमा देगा। पस तुम माहे रमज़ान (के ह़क़) में कोताही करने से डरो क्यूंकि यह अल्लाह का महीना है। अल्लाह तआला ने तुम्हारे लिये ग्यारह महीने कर दिये कि इन में ने’मतों से लुत़्फ़ अन्दोज़ हो और तलज़्ज़ुज़ (लज़्ज़त) ह़ासि़ल करो और अपने लिये एक महीना ख़ास़ कर लिया है। पस तुम माहे रमज़ान के मु-आमले में डरो।

 


सय्यिदतुना उम्मे हानी रजि से रिवायत है हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “मेरी उम्मत ज़लील व रुस्वा न होगी जब तक वो माहे रमज़ान का ह़क़ अदा करती रहेगी।” अ़र्ज़ की गई, या रसूलल्लाह रमज़ान के ह़क़ को ज़ाएअ़ करने में उन का ज़लील व रुस्वा होना क्या है ? फ़रमाया, “इस माह में उन का ह़राम कामों का करना। फिर फ़रमाया, जिस ने इस माह में जि़ना किया या शराब पी तो अगले रमज़ान तक अल्लाह और जितने आस्मानी फ़रिश्ते हैं सब उस पर ला’नत करते हैं। पस अगर यह शख़्स़ अगले माहे रमज़ान को पाने से पहले ही मर गया तो उस के पास कोई ऐसी नेकी न होगी जो उसे जहन्नम की आग से बचा सके। पस तुम माहे रमज़ान के मामले में डरो क्यूंकि जिस त़रह़ इस माह में और महीनों के मुक़ाबले में नेकियां बढ़ा दी जाती हैं इसी त़रह़ गुनाहों का भी मामला है।”

ऐ जन्नत के त़लबगार रोज़ादार इस्लामी भाइयो! रमज़ानुल मुबारक के मुक़द्दस लम्ह़ात को फु़ज़ूलियात व खु़राफ़ात में बरबाद होने से बचाइये! जि़न्दगी बेह़द मुख़्तस़र है इस को ग़नीमत जानिये, वक़्त “पास” (बल्कि बरबाद) करने के बजाए तिलावते कु़रआन और जि़क्रो दुरूद में वक़्त गुज़ारने की कोशिश फ़रमाइये। भूक प्यास की शिद्दत जिस क़दर ज्‍़यादा मह़सूस होगी स़ब्र करने पर स़वाब भी उसी क़दर ज़ाइद मिलेगा। जैसा कि मन्कू़ल है, “यानी अफ़्ज़ल इ़बादत वो है जिस में ज़ह़मत (तकलीफ़) ज्‍़यादा है।”
“दुनिया में जो नेक अ़मल जितना दुश्वार होगा कि़यामत के रोज़ नेकियों के पलडे़ में उतना ही ज्‍़यादा वज़्नदार होता है ।

इन रिवायात से स़ाफ़ ज़ाहिर हुआ कि हमारे लिये रोज़ा रखना जितना दुश्वार और नफ़्से बदकार के लिये जिस क़दर ना गवार होगा। बरोज़े शुमार मीज़ाने अ़मल में उतना ही ज्‍़यादा वज़्न-दार होगा।
अफ़्ज़ल कम सोना ही है फिर भी अगर ज़रूरी इ़बादात के इ़लावा कोई शख़्स़ सोया रहे तो गुनहगार न होगा) स़ाफ़ ज़ाहिर है कि जो दिन भर रोज़े में सो कर वक़्त गुज़ार दे उस को रोज़े का पता ही क्या चलेगा ? ज़रा सोचो तो सही! ह़ुज्जतुल इस्लाम ह़ज़रत सय्यिदुना इमाम मुह़म्मद ग़ज़ाली तो ज्‍़यादा सोने से भी मन्अ़ फ़रमाते हैं कि इस त़रह़ भी वक़्त फालतू गुजर जाएगा। तो जो लोग खेल तमाशों में और हराम कामों में वक़्त बरबाद करते हैं वो किस क़दर मह़रूम व बद नस़ीब हैं। इस मुबारक महीने की क़द्र कीजिये, इस का एह़तिराम बजा लाइये, इस में ख़ुशदिली के साथ रोज़े रखिये और अल्लाह की रज़ा ह़ासि़ल कीजिये। ऐ अल्लाह फै़ज़ाने रमज़ान से हर मुसल्मान को मालामाल फ़रमा। इस माहे मुबारक की हमें क़द्र व मन्जि़लत नस़ीब कर और इस की बेअदबी से बचा।माहे रमजान में जीभरकर गरीबों,यतीमों और मिस्कीनों की मदद करें ताकि कोई भूखा न रहे ।

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संतकबीरनगर। पूर्वाचल के जाने माने ज्योतिषाचार्य सुजीत श्रीवास्तव ने बताया कि इस वर्ष होलिका का दहन 9 मार्च को शुभ मुहूर्त के अनुसार है और रंगो की होली 10, मार्च को मनाया जाय। श्री श्रीवास्तव शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि त्योहारो को शुभ मुहूर्त पर मनाये जाने पर जीवन सुखमय व फलित होता है। उन्होने बताया कि फाल्गुन माह की पूर्णिमा 9 मार्च की भोर में 3 बजकर 3 मिनट पर प्रारम्भ हो रही है तथा रात्रि 11 बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो रही है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 9 मार्च को सांय काल 6 बजकर 26 मिनट से रात्रि 8 बजकर 52 मिनट तक ही रहेगा। उन्होने आयोजको से अनुरोध किया है कि उक्त समय के अन्दर पूजन अर्चन कर होलिका दहन करे। उन्होने बताया कि राशि के अनुरूप रंगो के खेले गए होली के विषय में बताते हुए कहा कि मेष राशि गुलाबी, लाल व पीला, वृष राशि हरा व नीला, मिथुन राशि हरा व सफेद, कर्क राशि पीला, सफेद व नारंगी, सिंह राशि लाल व पीला, कन्या राशि हरा व आसमानी, तुला राशि सफेद, नीला व हरा, वृश्चिक राशि लाल, सफेद व नारंगी, धनु राशि पीला व लाल, मकर राशि नीला, हरा व आसमानी, कुम्भ राशि सफेद व नीला तथा मीन राशि पीला, सफेद व लाल। ज्योतिषाचार्य सुजीत श्रीवास्तव ने जनपदवासियो को होली की बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

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जगदीशपुर-अमेठी--जगदीशपुर क्षेत्र के अन्तर्गत रानीगंज कस्बे के फैजाबाद रोड पर ज्येष्ठ माह के चौथे मंगल के अवसर पर प्रसाद 

जिसमें पूङी-सब्जी व बूँदी का वितरण किया। भीषण गर्मी में भक्तो ने जमकर प्रसाद का आनंद उठाया।
कार्यक्रम का नेतृत्व डा.प्रदीप तिवारी व डा. प्रज्ञा वाजपेयी ने
बजरंग बली के चित्र पर माल्यार्पण किया व धूप बत्ती जलाकर पूजन किया। वहीं भक्तो को अपने हाथो से प्रसाद वितरण करके कार्यक्रम शुभारंभ किया।
और कहाकि इसी तरह से भण्डारे का आयोजन होता रहेगा। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओ के सहयोग व समय देने के लिए के लोगों को धन्यवाद भी दिया।
इस मौके पर भाजपा नेता प्रदीप सिंह, अजय नरायन त्रिपाठी , महेन्द्र प्रताप सिंह , जितेन्द्र सिंह, गौरव मिश्रा आदि लोग उपास्थि रहे।

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मुकद्दस माह रमजानुल मुबारक का आखिरी अशरा चल रहा है यह आखिरी अशरा बहुत फजीलत और रहमत तथा बरकतों वाला है ।इस अशरा में गुनाहों से माफी मांगने,मगफिरत व जहन्नम से निजात पाने का मौका है। इस अशरे की सबसे बडी फजीलत यह है कि इसमें एक रात शबे कद्र की है जिसकी इबादत सत्तर हजार रातों की इबादत पर भारी है इसलिए इस रात को हर कोई पूरी रात जागकर बारगाहे ईलाही में अपने गुनाहों से तौबा करने के साथ ही अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआ करते हैं ।शबे कद्र की इस रात को लैलुतलकद्र भी कहा जाता है इसी पाक एवं मुकद्दस रात में कुराने करीम नाजिल हुई थी इस रात सिर्फ रहमतों की बारिश होती है और पूरी रात मुसलमान अपने गुनाहों से माफी मागंकर खुदा को राजी करता है वैसे तो इस मुकद्दस माह में हर रात और दिन काफी रहमतों और बरकतों वाला है लेकिन इस माह की सबसे अफजल रात शब- ए-कद्र की रात है ।
ब्लाक प्रमुख सेमरियावां मुमताज अहमद ने बताया कि इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बहुत ही बुलंद होते हैं। गुनाह बख्श दिए जाते हैं। दोजख की आग से निजात मिलती है।उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है। ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियां नामे-आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की विशेष रात में इबादत, तिलावत और दुआएं कुबूल व मकबूल होती हैं।

अल्लाह ताअला की बारगाह में रो-रोकर अपने गुनाहों की माफी तलब करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात खुदा ताअला नेक व जायज तमन्नाओं को पूरी फरमाता है। रमजान की विशेष नमाज तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज साहबान इसी शब में कुरआन मुकम्मल करते हैं, जो तरावीह की नमाज अदा करने वालों को सुनाया जाता है। इसके साथ घरों में कुरआन की तिलावत करने वाली मुस्लिम महिलाएं भी कुरआन मुकम्मल करती हैं।प्रमुख मुमताज ने मुसलमानों से इस दौरान गरीब और मजलूमों की मदद करने की बात कही उन्होंने कहा इस ईद में नये कपडे न खरीदें बल्कि उस पैसे से गरीबों और यतीमों की दिल खोलकर मदद करें ऐसे कार्यों का सिला खुदा हर हाल में अपने बंदों को देते हैं

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संतकबीरनगर--- पाक एवं मुकद्दस माह रमजानुल मुबारक का आखिरी अशरा चल रहा है जो कि बहुत फजीलत और रहमत तथा बरकतों वाला है ।यह आखिरी अशरा गुनाहों से माफी मांगने,मगफिरत व जहन्नम से निजात पाने वाला है इस अशरे की सबसे बडी खाशियत यह है कि इसमें एक रात शबे कद्र की है जिसकी इबादत सत्तर हजार रातों की इबादत पर भारी है इसलिए इस रात को हर कोई पूरी रात जागकर बारगाहे ईलाही में अपने गुनाहों से तौबा करने के साथ ही अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआ करते हैं ।शबे कद्र की इस रात को लैलुतलकद्र भी कहा जाता है इसी पाक एवं मुकद्दस रात में कुराने करीम नाजिल हुई थी इस रात सिर्फ रहमतों की बारिश होती है और पूरी रात मुसलमान अपने गुनाहों से माफी मागंकर खुदा को राजी करता है वैसे तो इस मुकद्दस माह में हर रात और दिन काफी रहमतों और बरकतों वाला है लेकिन इस माह की सबसे अफजल रात शब- ए-कद्र की रात है ।
मौलाना फुजैल अहमद नदवी ने बताया कि इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बुलंद होते हैं। गुनाह बख्श दिए जाते हैं। दोजख की आग से निजात मिलती है।उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है। ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियां नामे-आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की विशेष रात में इबादत, तिलावत और दुआएं कुबूल व मकबूल होती हैं।

अल्लाह ताअला की बारगाह में रो-रोकर अपने गुनाहों की माफी तलब करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात खुदा ताअला नेक व जायज तमन्नाओं को पूरी फरमाता है। रमजान की विशेष नमाज तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज साहबान इसी शब में कुरआन मुकम्मल करते हैं, जो तरावीह की नमाज अदा करने वालों को सुनाया जाता है। इसके साथ घरों में कुरआन की तिलावत करने वाली मुस्लिम महिलाएं भी कुरआन मुकम्मल करती हैं।

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●शीलू ने रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे" गीत के माध्यम से बांधा समा।

●खोगिये में बिटिया के मारा जन् माई" गीत के माध्यम से सर्व समाज को भ्रूण हत्या बन्द करने एवम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दिया सन्देश।

●शीलू ने "वैष्णव जन् तो तेरे कहिए पीर पराई जाने रे" गीत के माध्यम से पर पीड़ा को किया प्रदर्शित

संतकबीरनगर--अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद संत कबीर नगर के द्वारा फेसबुक लाइव के माध्यम से सांस्कृतिक संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थी परिषद सन्त कबीर नगर विशेष आमंत्रण पर लखनऊ दूरदर्शन की गायिका शीलू श्रीवास्तव ने प्रस्तुति दी। शीलू श्रीवास्तव ने अपने लाइव सेशन की शुरुआत वाणी वंदना से की ततपश्चात उन्होंने गुरु वंदना के माध्यम से गुरुओ को नमन किया। इसके बाद उन्होंने लोकगीत जिसमे कजरी, चैती आदि तमाम विधाओं के गीत प्रस्तुत किया। शीलू ने "वैष्णव जन् तो तेरे कहिए पीर पराई जाने रे" गीत के माध्यम से पर पीड़ा की अभिव्यक्ति की। इसके साथ ही "रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे" गीत के माध्यम से बांधा समा। इस तरह विभिन्न विधाओं के गीत प्रस्तुत कर शीलू ने वाहवाही प्राप्त की। अंतिम में "खोगिये में बिटिया के मारा जन् माई" गीत के माध्यम से सर्व समाज को भ्रूण हत्या बन्द करने एवम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दिया सन्देश।
इस live सेशन में प्रान्त के संगठन मंत्री आनंद गौरव, प्रदेश सहमंत्री अजय दुबे, तहसील प्रमुख माधवेन्द्र तिवारी, रीतेश श्रीवास्तव, हर्ष सिंह, सौरभ पाण्डेय, अरविंद चौधरी, सीमा सिंह, आदि तमाम लोग उपस्थित रहे।

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●जीवन में आध्यात्मिक आनंद तथा उन्नति प्राप्ति में सहायक है सहज योग

●सहज योग रोग प्रतिकारक क्षमता के विकास में है सहायक

●लॉक डाउन में सहजयोगी कर रहे है ऑनलाइन ध्यान
●ऑनलाइन माध्यमो से 50 देशों के लगभग 2 लाख लोग कर रहे है ध्यान

आज संपूर्ण विश्व कोरोना नामक वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। चारो तरफ निराशा का माहौल व्याप्त है। उपचार के कोई भी संसाधन उपलब्ध नही है। ऐसी स्थिति में दुनिया के कई देशों ने यह स्वीकार भी किया है कि इस विषाणु से निजात पाने हेतु ध्यान और आध्यात्म महत्वपूर्ण साबित हो सकते है। इस प्रक्रिया में सहज योग जो दुनिया के लगभग 140 देशों में पूर्णतः निःशुल्क संचालित होता है। इस लॉक डाउन के दौरान भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में फैले अपने साधको के लिए आनलाइन ध्यान की प्रक्रिया से जोड़ने का एक सफल प्रयोग किया है। यह जानकारी देते हुए "निर्मला देवी सहज योग ट्रस्ट" सन्त कबीर नगर के जिला समन्वयक माधवेन्द्र तिवारी ने बताया कि लॉक डाउन के बाद भी अपने साधको के सामूहिक ध्यान को नियमित करने हेतु ऑनलाइन ध्यान संचालित किया गया है। इस ऑनलाइन ध्यान कार्यक्रम का संचालन परम् पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल "प्रतिष्ठान पुणे" के माध्यम से किया जा रहा है। यूट्यूब लाइव के साथ ही "इंडिया सहजयोग फेसबुक पेज" एवम "मिक्सलर रेडियो" पर भी लाइव कार्यक्रम प्रसारित किया जा रहा है। सभी साधक प्रातः ध्यान हेतु सुबह 5:30 बजे एवम सायं काल ध्यान 7 बजे इन विभिन्न सोशल मीडया के माध्यम से कर सकते है। आगे बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सहज योग एक सूक्ष्म एवं जीवन्त क्रिया है। जिसमें शरीर के अंदर की शक्ति का योग प्रकृति में व्याप्त परमात्मा की प्रेम शक्ति से हो जाता है और हमारे अंदर परमात्मा की शक्ति चैतन्य के रूप में बहने लगती है और हम परमात्मा से जुड़ जाते हैं। इसी घटना को आध्यात्मिक जगत में योग कहते हैं। इस क्रिया की खोज परम पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी ने किया था। सहज योग के माध्यम से मानव जीवन में व्याप्त चिंता क्रोध तनाव कम होने लगते हैं। एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास होने लगता है। लोग विभिन्न प्रकार की कुप्रवृत्तियों से छुटकारा पाने लगते हैं तथा जीवन में आध्यात्मिक आनंद तथा उन्नति प्राप्त होने लगता है। इसका आनंद सभी धर्मों के लोग प्राप्त कर सकते हैं यह क्रिया नियमित ध्यान धारणा से संभव है। यह कुण्डलिनी जागरण पर आधारित है। कुण्डलिनी सभी मानव के अंतर व्याप्त है इनमें सात ऊर्जा के केंद्र है जिसे हम सात चक्र की संज्ञा देते है। शरीर के अंदर किसी भी प्रकार का विकार उत्पन्न होने का अर्थ है कि इन ऊर्जा केंद्रो अथवा चक्रों में विकार उत्पन्न होना। अतः इसे ध्यान और धारणा से संतुलन की स्थिति बनाते हुए विभिन्न्न समस्याओ का निराकरण किया जा सकता है। इस प्रकिया से व्यक्ति तनाव एवम सभी प्रकार की चिंता से मुक्त होकर एक अलग प्रकार के आनन्द की अनुभूति करता है जिसे आध्यत्मिक भाषा में परमानन्द कहते है। इस प्रक्रिया से व्यक्ति के अंदर रोग प्रतिकारक क्षमता का विकास होता है। जो इस महामारी में लोगो के लिए सहायक है। इस लॉक डाउन के समय में सोशल मीडिया एवं प्रौद्योगिकी का सकारात्मक उपयोग करते हुए विश्व के लोगों का एक साथ सामूहिकता में ध्यान करना उनके शारीरिक,मानसिक,स्वाथ्य को सुनिश्चित करने के साथ साथ तनाव एवम चिंता से मुक्त रखने में सहायक सिद्ध हो रहा है। ट्रस्ट द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार इस लॉक डाउन के दौरान अब तक लगभग 50 देशों के 2 लाख से अधिक लोगो ने सहज योग ध्यान के ऑनलाइन सत्र में सामूहिकता में ध्यान किया। अपने जिले के सैकड़ो साधक घर बैठे ही इसका लाभ प्राप्त कर रहे है। नए साधक हमारे टोल फ्री नम्बर 180030700800 पर फोन करके इस ध्यान से निःशुल्क जुड़ सकते है।

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सेमरियावां।संतकबीरनगर
त्रासदी आपदा के रूप में स्थापित हो चुका नोवल कोरोना वायरस लगभग 200 से अधिक देशों में फैल चुका हैं और अब यह संक्रमण धीरे-धीरे भारत में भी अपना पांव पसारता जा रहा है। इस वायरस के संकट से पुरी दुनिया के लोग प्रभावित हैं। इससे बचाव के लिए देश में लाकडाउन कर दिया गया हैं। लॉकडाउन टू में मुसलमानों के लिए खैर व बरकत का महीना माह रमजान कल से शुरू हो रहा हैं। इस पवित्र माह में लोग दिन व रात अल्लाह की इबादत में व्यस्त रहते हैं।पूरे महीने सेहरी, रोजा,अफतार, दुआ,खैरात, पांचों वक़्त की नमाज के साथ रात में विशेष नमाज अदा की जाती है। कोविड-19 को देखते हुए माहे रमजान में इस्लामिक विद्वानों ने जो गाइड लाइन बनायी हैं उसे क्षेत्र के मुस्लिम धर्म गुरु व बुद्ध जीवियों ने सभी लोगो से पालन करने का आह्वान किया हैं।


मौलाना शोएब अहमद नदवी ने कहा कि पवित्र माहे रमजान की आमद पर पूरे देश में 40 दिन के लॉकडाउन के चलते माहे रमजान के लिए देश के इस्लामिक विद्वानों,मुस्लिम तनजीमों,प्रसिद्ध दीनी इदारों ने केंद्र व प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के पालन हेतु पवित्र माहे रमजान के लिए विशेष एहतियात बरतने और कोविड 19 के बचाव के नियमो के पालन करने की हैं। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन का इस महामारी से बचाव में सहयोग की अपील की है।

मदरसा तालीमुल क़ुरआन सेमरियावा के मोहतमिम मौलाना मुनीर अहमद नदवी ने कहा कि चांद देखने के लिए भीड़ न लगाएं,पटाखा न फोड़ें,घर से बाहर न निकलें।
देश के मशहूर उलमाए कराम की हिदायत के अनुसार पांचों वक़्त की नमाज,नमाजे जुमा व विशेष माहे रमजान महीने में अदा की जाने वाली नमाजे तरावीह लॉक डाउन के चलते घरों में ही अदा करें।मस्जिद आने का प्रयास न करें।मस्जिद में भीड़ न लगाएं। धारा 144 का पालन करते हुए मस्जिद में सिर्फ इमाम मो अज्जिन व खादिम सीमित संख्या में नमाज अदा करें।पांच से अधिक कदापि न हों।वह भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण पालन करते हुए। मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए कदापि जिद न करें।

मौलना मुजीबुर्रहमान कासमी ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते घरों में नमाज पढ़ने पर मसजिद ही का सवाब मिलेगा।
इस्लामी विद्वानों ने ऐलान किया है कि इस बार माहे रमजान में अफ़तार पार्टी का आयोजन न करें।मस्जिदों में भी आफ्तार हेतु भीड़ न करें। अफ्तार की खरीदारी के लिए बाजार में भीड़ न लगाएं।बच्चों को बाजार न भेजें। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन द्वारा निश्चित किए गए समय में ही खरीदारी करें। अफ्तार पार्टी के आयोजन के बजाए जरूरतमंदों और मदरसों की आर्थिक मदद, दान ,सदका और जकात अदा करें।

मदनी मस्जिद इस्लामाबाद के इमाम ने कहा कि माहे रमजान में लाक डाउन के नियमों के पालन के तहत समाजी दूरी बनाए रखने, भीड़ से बचने के लिए अपने अपने घरों को मस्जिद बनाएं। दिन रात इबादत करें, नफिल नमाज पढ़े, पवित्र क़ुरआन की तिलावत करें।कुछ कमी हो तो सबर करें।

जिला पंचायत सदस्य मो अहमद ने युवा वर्ग से अपील किया है कि अफ्तारी के बाद सायं अनावश्यक न घूमें।दुकानें बन्द हैं।अपने अपने घरों में सुरक्षित रहें।गार्जियन बच्चों पर कंट्रोल करें।मोबाइल पर कीमती वक़्त बरबाद न करें।

शिक्षक जफीर अली करखी ने कोविड 19 के संकट से सभी देशवासी फिक्रमंद हैं।इससे बचने का सबसे आसान तरीका घर में रहें सुरक्षित रहें।अफवाह से बचें।लोगों को भीड़ से बचने हेतु प्रेरित करें।इस महामारी से बचाव हेतु जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को पूरा सहयोग दें।इस बरकत वाले महीने कोरोना मुक्त हेतु अल्लाह से दुआ मांगे।

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रमजान पर विशेष- पाक माह रमजान कल से शुरू हो रहा है जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं इस मुकद्दस माह का इंतेजार मुसलमानों को पूरे वर्ष रहता है लेकिन इस बार कोरोना जैसी महामारी की वजह से पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है एक माह तक होने वाली तरावीह की नमाज भी इस बार नहीं होगीं गुलजार रहने वाली मस्जिदें इसबार सुनसान रहेगीं ।जिसको लेकर लोग परेशान भी हैं लेकिन इस महामारी से निपटने के लिए मुसलमान लाकडाउन का पालन करें और घरों में खूब इबादत कर बारगाहे ईलाही कोरोना जैसी वबा से निजात के लिए दुआ करें ताकि पूरी दुनिया सुरक्षित रहे।

हदीस में आता है कि माहे रमज़ानुल मुबारक में नेकियों का अज्र बहुत बढ़ जाता है लिहाज़ा कोशिश कर के ज्‍़यादा से ज्‍़यादा नेकियां इस माह में जमा कर लेनी चाहियें।
माहे रमज़ान में एक दिन का रोज़ा रखना एक हज़ार दिन के रोज़ों से अफ़्ज़ल है और माहे रमज़ान में एक मरतबा तस्बीह़ करना (यानी कहना) इस माह के इ़लावा एक हज़ार मरतबा तस्बीह़ करने (यानी ) कहने से अफ़्ज़ल है और माहे रमज़ान में एक रक्अ़त पढ़ना गै़रे रमज़ान की एक हज़ार रक्अ़तों से अफ़्ज़ल है।

अमीरुल मुअ्मिनीन ह़ज़रते सय्यिदुना उ़मर फ़ारूक़े आज़म रजि से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: (तर्जमा) “रमज़ान में जि़क्रुल्लाह करने वाले को बख़्श दिया जाता है और इस महीने में अल्लाह तआला से मांगने वाला मह़रूम नहीं रहता।”

जो खु़श नस़ीब मुसल्मान माहे रमज़ान में इन्तिक़ाल करता है उस को सुवालाते क़ब्र से अमान मिल जाती, अ़ज़ाबे क़ब्र से बच जाता और जन्नत का ह़क़दार क़रार पाता है। “जो मो’मिन इस महीने में मरता है वो सीधा जन्नत में जाता है, गोया उस के लिये दोज़ख़ का दरवाज़ा बन्द हो जाता है।
ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने मस्ऊ़द रजि से रिवायत है, हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जिस को रमज़ान के इखि़्तताम के वक़्त मौत आई वो जन्नत में दाखि़ल होगा और जिस की मौत अ़रफ़ा के दिन (यानी 9 ज़ुल हि़ज्जतुल ह़राम) के ख़त्म होते वक़्त आई वो भी जन्नत में दाखि़ल होगा और जिस की मौत स़दक़ा देने की ह़ालत में आई वो भी दाखि़ले जन्नत होगा।”


उम्मुल मुअ्मिनीन सय्यि-दतुना आइशा सि़द्दीक़ा रजि से रिवायत है, हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं: “जिस का रोज़े की ह़ालत में इन्तिक़ाल हुआ, अल्लाह उस को कि़यामत तक के रोज़ों का स़वाब अ़त़ा फ़रमाता है।”
रोज़ादार किस क़दर नस़ीबदार है कि अगर रोज़़े की ह़ालत में मौत से हम-कनार हुआ तो कि़यामत तक के रोज़़ों के स़वाब का ह़क़दार क़रार पाएगा।

ह़ज़रते सय्यिदुना अनस बिन मालिक फ़रमाते हैं कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “यह रमज़ान तुम्हारे पास आ गया है, इस में जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे़ बन्द कर दिये जाते हैं और शयात़ीन को कै़द कर दिया जाता है, मह़रूम है वो शख़्स़ जिस ने रमज़ान को पाया और उस की मगि़्फ़रत न हुई कि जब इस की रमज़ान में मगि़्फ़रत न हुई तो फिर कब होगी।

माहे रमज़ान तो क्या आता है रह़मत व जन्नत के दरवाजे़ खुल जाते हैं ।दोज़ख़ को ताले पड़ जाते और शयात़ीन क़ैद कर लिये जाते हैं। चुनान्चे ह़ज़रते सय्यिदुना अबू हुरैरा रजि फ़रमाते हैं कि हुज़ूरे अकरमﷺ अपने स़ह़ाबए किराम को ख़ुश ख़बरी सुनाते हुए इर्शाद फ़रमाते हैं “रमज़ान का महीना आ गया है जो कि बहुत ही बा बरकत है। अल्लाह तआला ने इस के रोज़े तुम पर फ़र्ज़ किये हैं, इस में आस्मान के दरवाजे़ खोल दिये जाते हैं। और जहन्नम के दरवाज़े बन्द कर दिये जाते हैं। सरकश शैत़ानों को क़ैद कर लिया जाता है। इस में अल्लाह तआला की एक रात शबे क़द्र है, जो हज़ार महीनों से बढ़ कर है जो इस की भलाई से मह़रूम हुआ वोही मह़रूम है।”
जब रमज़ान आता है तो आस्मान के दरवाजे़ खोल दिये जाते हैं।
रिवायात में आता है कि जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और दोज़ख़ के दरवाज़े बन्द कर दिये जाते हैं शयात़ीन जन्ज़ीरों में जकड़ दिये जाते हैं। एक रिवायत में है कि रह़मत के दरवाजे़ खोले जाते हैं।


कि माहे रमज़ान में आसमानों के दरवाज़े भी खुलते हैं जिन से अल्लाह की ख़ास़ रहमतें ज़मीन पर उतरती हैं और जन्नतों के दरवाज़े भी जिस की वजह से जन्नत वाले हू़रो गि़ल्मान को ख़बर हो जाती है कि दुनिया में रमज़ान आ गया और वो रोज़ा दारों के लिये दुआओं में मश्ग़ूल हो जाते हैं।

माहे रमज़ान में व
दोज़ख़ के दरवाजे़ ही बन्द हो जाते हैं जिस की वजह से इस महीने में गुनहगारों बल्कि काफि़रों की क़ब्रों पर भी दोज़ख़ की गरमी नहीं पहुंचती। वो जो मुसलमानों में मश्हूर है कि रमज़ान में अ़ज़ाबे क़ब्र नहीं होता इस का येही मत़लब है और ह़क़ीक़त में इब्लीस मअ़ अपनी जु़िर्रय्यतों (यानी औलाद) के क़ैद कर दिया जाता है। इस महीने में जो कोई भी गुनाह करता है वो अपने नफ़्से अम्मारा की शरारत से करता है न शैत़ान के बहकाने से।


रमज़ानुल मुबारक में हमारी मसाजिद ग़ैरे रमज़ान के मुक़ाबले में ज्‍़यादा आबाद हो जाती हैं। नेकियां करने में आसानियां रहती हैं और इतना ज़रूर है कि माहे रमज़ान में गुनाहों का सिल्सिला कुछ न कुछ कम हो जाता है।

ह़ज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुल्लाह इब्ने अ़ब्बास रजि से मरवी है कि हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “बेशक जन्नत माहे रमज़ान के लिये एक साल से दूसरे साल तक सजाई जाती है, पस जब माहे रमज़ान आता है तो जन्नत कहती है, “ऐ अल्लाह! मुझे इस महीने में अपने बन्दों में से (मेरे अन्दर) रहने वाले अ़त़ा फ़रमा दे।” और हू़रेई़न कहती हैं, “ऐ अल्लाह! इस महीने में हमें अपने बन्दों में से शौहर अ़त़ा फ़रमा” फिर सरकारे मदीना ने इर्शाद फ़रमाया, “जिस ने इस माह में अपने नफ़्स की हि़फ़ाज़त की कि न तो कोई नशा आवर शय पी और न ही किसी मो’मिन पर बोहतान लगाया और न ही इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह हर रात के बदले इस का सौ ह़ूरों से निकाह़ फ़रमाएगा और उस के लिये जन्नत में सोने, चांदी, याकू़त और ज़बरजद का ऐसा मह़ल बनाएगा कि अगर सारी दुनिया जम्अ़ हो जाए और इस मह़ल में आ जाए तो इस मह़ल की उतनी ही जगह घेरेगी जितना बकरियों का एक बाड़ा दुनिया की जगह घेरता है और जिस ने इस माह में कोई नशा आवर शय पी या किसी मो’मिन पर बोहतान बांधा या इस माह में कोई गुनाह किया तो अल्लाह उस के एक साल के आ’माल बरबाद फ़रमा देगा। पस तुम माहे रमज़ान (के ह़क़) में कोताही करने से डरो क्यूंकि यह अल्लाह का महीना है। अल्लाह तआला ने तुम्हारे लिये ग्यारह महीने कर दिये कि इन में ने’मतों से लुत़्फ़ अन्दोज़ हो और तलज़्ज़ुज़ (लज़्ज़त) ह़ासि़ल करो और अपने लिये एक महीना ख़ास़ कर लिया है। पस तुम माहे रमज़ान के मु-आमले में डरो।

 


सय्यिदतुना उम्मे हानी रजि से रिवायत है हुज़ूरे अकरमﷺ फरमाते हैं, “मेरी उम्मत ज़लील व रुस्वा न होगी जब तक वो माहे रमज़ान का ह़क़ अदा करती रहेगी।” अ़र्ज़ की गई, या रसूलल्लाह रमज़ान के ह़क़ को ज़ाएअ़ करने में उन का ज़लील व रुस्वा होना क्या है ? फ़रमाया, “इस माह में उन का ह़राम कामों का करना। फिर फ़रमाया, जिस ने इस माह में जि़ना किया या शराब पी तो अगले रमज़ान तक अल्लाह और जितने आस्मानी फ़रिश्ते हैं सब उस पर ला’नत करते हैं। पस अगर यह शख़्स़ अगले माहे रमज़ान को पाने से पहले ही मर गया तो उस के पास कोई ऐसी नेकी न होगी जो उसे जहन्नम की आग से बचा सके। पस तुम माहे रमज़ान के मामले में डरो क्यूंकि जिस त़रह़ इस माह में और महीनों के मुक़ाबले में नेकियां बढ़ा दी जाती हैं इसी त़रह़ गुनाहों का भी मामला है।”

ऐ जन्नत के त़लबगार रोज़ादार इस्लामी भाइयो! रमज़ानुल मुबारक के मुक़द्दस लम्ह़ात को फु़ज़ूलियात व खु़राफ़ात में बरबाद होने से बचाइये! जि़न्दगी बेह़द मुख़्तस़र है इस को ग़नीमत जानिये, वक़्त “पास” (बल्कि बरबाद) करने के बजाए तिलावते कु़रआन और जि़क्रो दुरूद में वक़्त गुज़ारने की कोशिश फ़रमाइये। भूक प्यास की शिद्दत जिस क़दर ज्‍़यादा मह़सूस होगी स़ब्र करने पर स़वाब भी उसी क़दर ज़ाइद मिलेगा। जैसा कि मन्कू़ल है, “यानी अफ़्ज़ल इ़बादत वो है जिस में ज़ह़मत (तकलीफ़) ज्‍़यादा है।”
“दुनिया में जो नेक अ़मल जितना दुश्वार होगा कि़यामत के रोज़ नेकियों के पलडे़ में उतना ही ज्‍़यादा वज़्नदार होता है ।

इन रिवायात से स़ाफ़ ज़ाहिर हुआ कि हमारे लिये रोज़ा रखना जितना दुश्वार और नफ़्से बदकार के लिये जिस क़दर ना गवार होगा। बरोज़े शुमार मीज़ाने अ़मल में उतना ही ज्‍़यादा वज़्न-दार होगा।
अफ़्ज़ल कम सोना ही है फिर भी अगर ज़रूरी इ़बादात के इ़लावा कोई शख़्स़ सोया रहे तो गुनहगार न होगा) स़ाफ़ ज़ाहिर है कि जो दिन भर रोज़े में सो कर वक़्त गुज़ार दे उस को रोज़े का पता ही क्या चलेगा ? ज़रा सोचो तो सही! ह़ुज्जतुल इस्लाम ह़ज़रत सय्यिदुना इमाम मुह़म्मद ग़ज़ाली तो ज्‍़यादा सोने से भी मन्अ़ फ़रमाते हैं कि इस त़रह़ भी वक़्त फालतू गुजर जाएगा। तो जो लोग खेल तमाशों में और हराम कामों में वक़्त बरबाद करते हैं वो किस क़दर मह़रूम व बद नस़ीब हैं। इस मुबारक महीने की क़द्र कीजिये, इस का एह़तिराम बजा लाइये, इस में ख़ुशदिली के साथ रोज़े रखिये और अल्लाह की रज़ा ह़ासि़ल कीजिये। ऐ अल्लाह फै़ज़ाने रमज़ान से हर मुसल्मान को मालामाल फ़रमा। इस माहे मुबारक की हमें क़द्र व मन्जि़लत नस़ीब कर और इस की बेअदबी से बचा।माहे रमजान में जीभरकर गरीबों,यतीमों और मिस्कीनों की मदद करें ताकि कोई भूखा न रहे ।

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संतकबीरनगर। पूर्वाचल के जाने माने ज्योतिषाचार्य सुजीत श्रीवास्तव ने बताया कि इस वर्ष होलिका का दहन 9 मार्च को शुभ मुहूर्त के अनुसार है और रंगो की होली 10, मार्च को मनाया जाय। श्री श्रीवास्तव शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि त्योहारो को शुभ मुहूर्त पर मनाये जाने पर जीवन सुखमय व फलित होता है। उन्होने बताया कि फाल्गुन माह की पूर्णिमा 9 मार्च की भोर में 3 बजकर 3 मिनट पर प्रारम्भ हो रही है तथा रात्रि 11 बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो रही है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 9 मार्च को सांय काल 6 बजकर 26 मिनट से रात्रि 8 बजकर 52 मिनट तक ही रहेगा। उन्होने आयोजको से अनुरोध किया है कि उक्त समय के अन्दर पूजन अर्चन कर होलिका दहन करे। उन्होने बताया कि राशि के अनुरूप रंगो के खेले गए होली के विषय में बताते हुए कहा कि मेष राशि गुलाबी, लाल व पीला, वृष राशि हरा व नीला, मिथुन राशि हरा व सफेद, कर्क राशि पीला, सफेद व नारंगी, सिंह राशि लाल व पीला, कन्या राशि हरा व आसमानी, तुला राशि सफेद, नीला व हरा, वृश्चिक राशि लाल, सफेद व नारंगी, धनु राशि पीला व लाल, मकर राशि नीला, हरा व आसमानी, कुम्भ राशि सफेद व नीला तथा मीन राशि पीला, सफेद व लाल। ज्योतिषाचार्य सुजीत श्रीवास्तव ने जनपदवासियो को होली की बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

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