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विचारों को फैलाकर प्रशंसा के पात्र बने अधिवक्ता

 

 


--- लाकडाउन अवधि में सोशल मीडिया को हथियार बनाकर निरन्तर भेज रहे संदेश
--- विगत लगभग पांच वर्षों से जनपदवासियों को प्रतिदिन मिल रहा अच्छे विचार
--- प्रतिदिन लगभग पाँच हजार पाठक हो रहे हैं लाभान्वित
सन्तकबीरनगर : कहा जाता है कि किसी व्यक्ति के विचार ही उसका व्यक्तित्व बनाते हैं। जैसा व्यक्ति होगा, उसका व्यक्तित्व भी वैसा ही बनेगा। समाज को प्रेरणा देने वाले विचार रखने वाले व्यक्ति लम्बे समय तक स्मरण किए जाते हैं। वर्तमान परिवेश में जब सुविचारों को ही तिलांजलि दी जा रही हो,ऐसे में लोगों को आत्मनिरीक्षण किये जाने की आवश्यकता है। देश में कोरोना के चलते लाकडाउन के संकट से दो-चार होना पड़ रहा है। ऐसे में प्रेरणादायक विचार लोगों को काफी भा रहे हैं। जनपद सन्तकबीरनगर में इस कार्य को पिछले लगभग पांच वर्षों से प्रतिदिन करने वाले पेशे से अधिवक्ता अन्जय कुमार श्रीवास्तव की भूमिका काफी सराहनीय है। प्रतिदिन प्रातःकाल लगभग पांच हजार लोग उनके विचारों को पढ़ने के साथ-साथ उसे आत्मसात करने का प्रयास भी कर रहे हैं।
बेहद सरल स्वभाव के धनी पेशे से अधिवक्ता व दैनिक जागरण समाचार पत्र के कानूनी पटल देखने वाले अन्जय कुमार श्रीवास्तव के पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो पता चलता है कि वर्ष 1991 में उन्होंने एक कोचिंग संस्था की नींव डाली। तब से लगातार लगभग 28 वर्षों तक उन्होंने वकालत के साथ-साथ निजी शिक्षण कार्य भी किया। उस दौरान प्रतिदिन सैकड़ों छात्र/छात्राएं उनके संस्थान में पढ़कर उच्च पद पर हैं। एम.काम.,एम.ए.( अंग्रेजी ), व एल.एल.बी. की डिग्री हासिल कर पिछले वर्षों में कई बार उच्चतर न्यायिक परीक्षा में प्रारम्भिक व लिखित परीक्षाओं में सफलता मिलने के बावजूद अंतिम स्तर पर सफलता नही मिल सकी है। अभी भी प्रयास जारी है। वर्तमान में वकालत से आजीविका कमाने वाले अधिवक्ता अन्जय कुमार श्रीवास्तव की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से संचालित होने वाले विधिक जागरुकता शिविर में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जरुरतमन्द व असहाय लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता कर उनकी पैरवी भी करते हैं। उनका कहना है कि समाज मे व्याप्त बुराइयों के विषय मे प्रकाश डालने के साथ-साथ लोगों की मदद करने में बेहद आत्मसंतुष्टि महसूस होती है।

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