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स्तनपान शिशु मृत्युदर कम करने का सबसे सशक्त माध्यम: अर्पणा उपाध्याय_रवि गुप्त

 

- विश्व स्तनपान सप्ताह की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं यूनिसेफ द्वारा हुई आॅनलाइन मीडिया मीट
-कोरोना के समय भी स्तनपान है शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार, सावधानी से नहीं फैलता संक्रमण
बलरामपुर 31 जुलाई। मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम है। इस समय जब पूरा देश कोरोना वायरस से जूझ रहा है, तब भी स्तनपान शिशु के लिए जीवन रक्षक है। विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना वायरस मां के दूध से नहीं फैलता, इसलिए कोरोना पीड़ित व संदिग्ध होने पर भी मां कोरोना वायरस से बचाव के उपायों का पालन करते हुए एवं मास्क का प्रयोग कर स्तनपान जारी रख सकती हैं।
कोविड-19 स्तनपान से जुड़े सवालों के जवाब देने व स्तनपान की महत्ता जनमानस तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं यूनिसेफ द्वारा एक आॅनलाइन मीडिया मीट का आयोजन किया गया। विश्व स्तनपान सप्ताह की पूर्व संध्या पर आयोजित इस मीडिया मीट में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अर्पणा उपाध्याय ने कहा स्तनपान शिशु मृत्यु दर कम करने का सबसे सशक्त माध्यम है। स्तनपान शिशु के आरंभिक शारीरिक व मानसिक विकास में भी सहायक होता है।
बैठक में उपस्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के चाइल्ड हेल्थ मैनेजर डॉ वेद प्रकाश ने कहा मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है। बाजार में मिलने वाले डिब्बा बंद दूध, मां के दूध का स्थान नहीं ले सकते। यह डिब्बा बंद दूध शिशु को स्तनपान से होने वाले लाभ से वंचित रखते हैं और पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हैं। डिब्बा बंद दूध के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए एक्ट भी बनाए गए हैं। इस विषय में जागरूकता फैलाने की विशेष जरूरत है।
कोविड-19 के समय स्तनपान के विषय पर प्रकाश डालते हुए यूनिसेफ की पोषण विशेषज्ञ डा. ऋचा सिंह पांडे ने कहा स्तनपान शिशु का पहला अधिकार है। यह प्रकृति का वरदान है, जिससे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है एवं शारीरिक एवं मानसिक विकास भी बेहतर होता है। उन्होने कहा कि कोविड उपचाराधीन होने पर भी मां शिशु को कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए स्तनपान करा सकती है।
प्रतिवर्ष 1 से 7 अगस्त को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को स्तनपान के महत्व को समझाना एवं उन्हें स्तनपान के लिए प्रेरित करना है। लैनसेट 2016 के अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष विश्व में 8,20,000 बच्चों की मृत्यु स्तनपान के अभाव में होती है। भारत में 6 माह तक केवल स्तनपान कराने की दर 55 फीसदी होने के बावजूद प्रत्येक वर्ष डायरिया एवं निमोनिया जैसी बीमारियों के कारण अनुमानित 5 वर्ष से कम आयु के 99,499 बच्चों की मृत्यु हो जाती है। इन मृत्यु को 1 घंटे के अंदर स्तनपान की शुरुआत करने व छह माह तक केवल स्तनपान जारी रखकर रोका जा सकता है। इस मीट में स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के अधिकारियों के साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों से पत्रकारों ने डिजिटल माध्यम से प्रतिभाग किया।

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