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कोविड 19ः मानसिक तनाव से बचाने के लिए अब काऊंसिलिंग की पहल_रिपोर्ट-रवि गुप्त

 

 

 

 


-शेल्टर होम्स या आश्रय स्थलों में रह रहे लोगों को मिलेगी सुविधा
-शासन ने सीएमओ और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को दिये निर्देश
बलरामपुर 04 अप्रैल। लॉकडाउन के दौरान आश्रय स्थलों या शेल्टर होम्स में रह रहे प्रवासी मजदूरों को मानसिक तनाव बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अनोखी पहल की है। इन मजदूरों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए अब उनकी काऊंसिलिंग की जाएगी। इस दौरान उन्हे बताया जाएगा कि लॉकडाउन के दौरान उनको अपना समय बेहतर तरीके से किस तरह व्यतीत करना है। इस संबंध में महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं ने सीएमओ और जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को शासनादेश जारी किया है।
पत्र में मानसिक स्वास्थ्य के राज्य नोडल अधिकारी सुनील पांडे ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट की रिट पिटीशन संख्याः 468/2020 एवं 469/2020 में दिये गए निर्देशों के अनुपालन में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भूमिका अहम है। गौरतलब है कि कोर्ट ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह सुनिश्चित करें कि लॉकडाउन के दौरान समस्त शेल्टर होम्स में आमजन को किसी तरह के मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े। इस संबंध में जिल के स्वास्थ्य विभाग को शुक्रवार को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि लॉकडाउन के दौरान शेल्टर होम्स या आश्रय स्थलों में रह रहे प्रवासी मजदूरों को मानसिक रूप से स्वस्थ्य रखने के लिए समय-समय पर उनकी काऊंसिलिंग की जाए। इस कार्य के लिए जिले में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत तैनात साइकेट्रिस्ट, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और साइकेट्रिक सोशल वर्कर की मदद लें। साथ ही यह भी निर्देश है कि जिन जनपदों में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संसाधन उपलब्ध नहीं है वहां राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम या अन्य कार्यक्रम में तैनात क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, काऊंस्लर्स और साइकोलॉजिस्ट से सेवाएं ली जाएं। पत्र में यह भी स्पष्ट है कि लॉकडाउन के दौरान शेल्टर होम्स या आश्रय स्थलों में काऊंसिलिंग कार्य सुचारु रूप से चलाने के आवागमन और सुरक्षा आदि का भी पूरा ध्यान रखा भी जाये। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. घनश्याम सिंह ने शनिवार को बताया कि शासन का पत्र मिला है। गाइडलाइन के अनुसार जिले के मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी को व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दे दिये गये हैं। टीमें बनने के बाद जल्द ही उन्हे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाकर शेल्टर होम्स में मौजूद लोगों की काउंसलिंग करने के लिए भेजा जाएगा।

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