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संतकबीरनगर-निषाद समाज के पूर्वजों ने प्रभु श्रीराम का सेवा किया था-सांसद इं0 प्रवीण_रिपोर्ट-बिट्ठल दास

ऽ देश के प्रधानमंत्री ने असम्भव को सम्भव किया अब राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में निषादो को भी सेवा...

संतकबीरनगर-निषाद समाज के पूर्वजों ने प्रभु श्रीराम का सेवा किया था-सांसद इं0 प्रवीण_रिपोर्ट-बिट्ठल दास
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ऽ देश के प्रधानमंत्री ने असम्भव को सम्भव किया अब राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में निषादो को भी सेवा करने का मौका मिलना चाहिए जिससे उनका जीवन सफल हो।

संतकबीरनगर। सांसद इं0 प्रवीण निषाद ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह ने नित नये दिन असम्भव को सम्भव करने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री ने जो कहा वो किया। पूरे देशवासियो को उन पर गर्व है देश को शीर्ष स्थान पर पहुॅचाने, हिन्दुत्व की रक्षा करने, सबका साथ सबका विकास को कायम रखने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है। संासद इं0 प्रवीण निषाद ने कहा कि निषाद समाज के पूर्वजो ने प्रभु श्रीराम का सेवा किया था और अब राम की जन्मभूमि अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए न्यास बनाया जा रहा है उसमें भगवान श्रीराम के आत्म बाल सखा गुहाराज निषाद जी के वंशजो को सेवा करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होने कहा कि श्रीराम जन्म भूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र निर्माण ट्रस्ट भगवान श्री राम के वृहद मंदिर निर्माण के लिए बनाया गया है। अयोध्या से निर्वासित होने के बाद भगवान श्री राम, पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या से निर्वाशित होने के बाद अपने आत्म बल सखा ऋंगवेरपुर के महाराजा गुहाराज निषाद के वहाॅ रात बितायी। सांसद इं0 प्रवीण निषाद ने कहा कि रामचरित मानस की चैपाई में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि ''केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि सिंगरौर गवाँई, होत प्रात बट छीरु मगावा। जटा मुकुट निज सीस बनावा।'' जिसका अर्थ है कि केवट प्रभु निषादराज के कहने पर प्रभु श्री राम की बहुत सेवा की। वह रात भगवान श्री राम सिंगरौर (श्रृंगवेरपुर) में ही बिताई। दूसरे दिन सबेरा होते ही बड़ का दूध मँगवाया और उससे श्री राम-लक्ष्मण ने अपने सिरों पर जटाओं के मुकुट बनाए सुबह निषादराज जी ने अपनी सेना के साथ भगवान श्री रामचंद्र को ऋंगवेरपुर से चित्रकूट के लिए प्रस्थान कराया। 'राम सखाँ तब नाव मगाई। प्रिया चढ़ाई चढ़े रघुराई। लखन बान धनु धरे बनाई। आपु चढ़े प्रभु आयसु पाई। जिसका अर्थ है कि तब श्री रामचन्द्रजी के सखा ऋँगवेरपुर के महाराजा निषादराज जी ने नाव मँगवाई। पहले प्रिया सीताजी को उस पर चढ़ाकर फिर श्री राम चढ़े। फिर लक्ष्मणजी ने धनुष-बाण सजाकर रखे और प्रभु श्री रामचन्द्र जी की आज्ञा पाकर स्वयं निषादराज जी चढ़े। आज जब श्री राम की जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए न्यास बनाया जा रहा है। सांसद इं0 प्रवीण निषाद ने राम मंदिर ट्रस्ट गठन पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दी।