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संतकबीर नगर-मानवाधिकार दिवस पर विद्ववतजनों ने रखा अपना विचार, लें सीख_रिपोर्ट-बिट्ठल दास

संतकबीरनगर। मानवाधिकार एक सभ्य समाज की अवधारणा है। मानव के अधिकारों के संरक्षण के बिना उसके...

संतकबीर नगर-मानवाधिकार दिवस पर विद्ववतजनों ने रखा अपना विचार, लें सीख_रिपोर्ट-बिट्ठल दास
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संतकबीरनगर। मानवाधिकार एक सभ्य समाज की अवधारणा है। मानव के अधिकारों के संरक्षण के बिना उसके व्यक्तित्व का विकास नही हो सकता। फ्रांस की राज्य क्रान्ति का नाम था, स्वतंत्रता समानता एवं भातृत्ववाद। 10, दिसम्बर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकारों की घोषणा की। इसी महत्व के कारण प्रतिवर्ष 10 दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। उक्त विचार स्थानीय हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय प्राचार्य डा0 रामसोच यादव ने बौद्विक परिचर्चा में व्यक्त किया। राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डाॅ0 दिग्विजयनाथ पाण्डेय ने कहा कि 1688 ई0 की गौरवपूर्ण क्रांति मानवाधिकार स्थापना का प्रमुख सीमा चिन्ह है। इसी के द्वारा निरंकुश राजतंत्र के खिलाफ जनता की सत्ता की विजय हुई। नाजीवाद, फासीवाद की सत्ताओ ने मानवाधिकारी पर बहुत कुठाराघात किया। लोकतंत्र एवं उद्वारवादी शासन तंत्रो के पश्चात मानवाधिकारों का संरक्षण हो सका। लेकिन मानवाधिकारो की रक्षा के साथ-साथ हमें कर्तव्य बोध की तरफ भी ध्यान देना होगा। डाॅ0 प्रताप विजय कुमार अध्यक्ष प्राचीन इतिहास विभाग ने कहा कि मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए हमें उसके महत्व एवं शिक्षण पर भी ध्यान देना होगा। डा0 विजय कुमार राय ने कहा कि मानवाधिकार एवं नागरिक कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक है। हमें गरीबी, वंचितो एवं पिछड़ो को महत्व देकर, उनके अधिकारो की रक्षा कर सामाजिक न्याय की संकल्पना को साकार करना होगा। डाॅ0 अमरनाथ पाण्डेय ने कहा कि मानवाधिकार की संकल्पना का आधार मानव की विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। यही लोकतंत्र का आधार है। मानवाधिकार मानवों के है, दानवों के नही।