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संतकबीर नगर-पराली न जलाने का फरमान महज खानापूर्ति तक सीमित_रिपोर्टः- मु. परवेज़ अख्तर

संतकबीरनगर।किसानों द्वारा पराली को खेतो में नहीं जलाने का शासन द्वारा जारी किया गया फरमान महज...

संतकबीर नगर-पराली न जलाने का फरमान महज खानापूर्ति तक सीमित_रिपोर्टः- मु. परवेज़ अख्तर
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संतकबीरनगर।किसानों द्वारा पराली को खेतो में नहीं जलाने का शासन द्वारा जारी किया गया फरमान महज खानापूर्ति साबित हो रहा हैं क्षेत्र में शाम होते होते थाने के इर्द-गिर्द किसान बेझिझक होकर फसलों के अवशेष को जलाने का काम बखूबी निभा रहे हैं।

बताते चले कि इस समय किसानों द्वारा धान कटाई के बाद बचे फसल अवशेषो का निस्तारण करने के बजाय उसे खेतो में जलाने काम कर रहे हैं खेतों में पराली जलाने से जहां पर्यावरण को काफी हानि पहुचंती है तो वहीं भूमि की उपजाऊ क्षमता निष्क्रिय रूप धारण कर लेती हैं जिन्हें देखते हुए प्रशासन ने पराली को खेतो में नहीं जलाने का आदेश दिया हुआ हैं फिर भी क्षेत्र के गांवों के सीवानों में पराली जलाने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। रात्रि लगभग नौ बजें के आस पास किसान बिना किसी डर के फसल अवशेष को जलाने का काम कर रहे हैं। शासन प्रशासन की सारी कवायद नाकाम साबित हो रही है।

किसानों के लिए पराली बनी मुसीबत

काफी मशक्कत के बाद धान की फसल जब तैयार हुई तो किसानों के चेहरे खुशी से चमक उठे। लेकिन अचानक नये सरकारी फरमान किसानों की परेशानी का कारण बने हुए हैं। धान की फसल की कटाई के साथ गेहूं व मटर की बुआई सिर पर थी ही अब पराली जलाने पर कार्रवाई। बुआई में हो रही देरी केे चलते खेेेत की नमी जाने का डर सता रहा है।