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संतकबीरनगर- मिश्रौलिया गाँव मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापन

खलीलाबाद ब्लाक के मिश्रौलिया में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन रविवार को हवन पूजन से हुआ। अंतिम...

संतकबीरनगर- मिश्रौलिया गाँव मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापन
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खलीलाबाद ब्लाक के मिश्रौलिया में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का समापन रविवार को हवन पूजन से हुआ। अंतिम दिन कथा व्यास अजय शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण से पूजन कराया। राजा परिक्षित की कथा को पूरी करके शुकदेव महाराज की विदाई कराकर प्रसंग को विराम दिया।

कथा व्यास ने सुदामा चरित्र एवं गुरु की महिमा की कथा का वर्णन करते हुए कि जीवन में गुरु का होना आवश्यक है गुरु हमारे जीवन की दशा एवं दिशा दोनों को बदलते है लेकिन हमें दुख इस बात का है कि हम गुरु को बहुत मानते है लेकिन गुरु की बातों को नही मानते। इसी कारण हम दुखी होते है गुरु मिलने से हमारा नया जन्म होता है। गुरु से मार्ग दर्शन एवं गुरु ही हमारे कष्टो को दूर करता है। उन्होंने कहा कि हम भले ही सुदामा हो लेकिन मित्र कृष्ण जैसा ही बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं, पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था। जिसे देखने वाले अचंभित रह गए थे। आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।

कथा व्यास ने कहा कि कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां हैं। यही कारण है कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल को धाम, बतावत आपन नाम सुदामा, सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए। लोग समझ नहीं पाए कि आखिर सुदामा में क्या खासियत है कि भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंगई।

न पर बैठाकर सुदामा के पांव पखारे। कृष्ण-सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे.

कथा व्यास ने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भागवत कथा का श्रवण करता है उसका संबंध कृष्ण से अपने आप ही जुड़ जाता है तथा कृष्ण की कृपा उन पर सदा बनी रहती है और उस व्यक्ति पर कलयुग भी अपना प्रभाव नहीं जमा पाता। कथा में कृष्ण भगवान की सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों का वर्णन किया। शांत पाठ व शुकदेव जी की विदाई, व्यास पीठ पूजन के साथ कथा पूर्ण की गई।

सोमवार को पूर्णाहुति पर हवन के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा.

संगीतकार पंकज लवानिया, शिवकुमार शर्मा, मदन शर्मा और माधवजी ने कई सुंदर भजन सुनाकर भक्तों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। इस दौरान मुख्य यजमान कृष्णदेव त्रिपाठी, कमलावती, अशोक कुमार श्रीवास्तव, हीरालाल त्रिपाठी, घनश्याम उपाध्याय, अभिषेक त्रिपाठी, डां. संतोष त्रिपाठी, विवेक सिंह, राजेश दुबे, विवेकानंद शुक्ल आदि मौजूद रहे।