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संतकबीर नगर-श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन की रास कथा सुन भक्ति के रस में गोते लगाते रहे भक्तगण_रिपोर्ट-मो0 अदनान

संतकबीर नगर-खलीलाबाद के मिश्रौलिया गांव में चल रहे श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन वृंदावन धाम से आए...

संतकबीर नगर-श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन की रास कथा सुन भक्ति के रस में गोते लगाते रहे भक्तगण_रिपोर्ट-मो0 अदनान
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संतकबीर नगर-खलीलाबाद के मिश्रौलिया गांव में चल रहे श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन वृंदावन धाम से आए कथा व्यास अजय कृष्ण शास्त्री ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। भारी संख्या मे भक्तगण कथा श्रवण हेतु शामिल हुये |

कथा के दौरान कथा व्यास ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आवाहन किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। उन्होंने बताया कि रास का तात्पर्य परमानंद की प्राप्ति है जिसमें दुःख , शोक आदि से सदैव के लिए निवृत्ति मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास के माध्यम से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवाई। भागवत में रास पंचाध्यायी का पूर्ण वैज्ञानिक विश्लेषण है, उन्होंने कहा कहा कि भगवान कृष्ण ने 16108 कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण कर दिया। भागवत कथा के छठवें दिन कथा स्थल पर रूक्मणी विवाह में उपस्थित भक्तों ने जमकर फूलो की बरसात की।

इस दौरान हीरालाल त्रिपाठी, सतीश उपाध्याय, भजन गायक गोरखनाथ मिश्र, अशोक कुमार श्रीवास्तव, रघुवंश मणि उपाध्याय, राजेश सिंह, रामदौर यादव, रामबहाल, अभिषेक त्रिपाठी, रामदेव, संजय त्रिपाठी, रामउजागिर, घनश्याम, सुनील, दयाशंकर त्रिपाठी, संस्कार, अभिनेश आदि लोग मौजूद रहे.