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बजट से वोट फैक्ट्री को लुभाने की कोशिश_"मन की बात"_ अजय श्रीवास्तव एडिटर इन चीफ सत्यमेव जयते लाइव

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी सरकार का आख़ीरी...

👤 Anonymous2 Feb 2018 10:54 AM GMT
बजट से वोट फैक्ट्री को लुभाने की कोशिश_मन की बात_ अजय श्रीवास्तव एडिटर इन चीफ सत्यमेव जयते लाइव
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी सरकार का आख़ीरी पूर्ण बजट पेश किया।सरकार के अंतिम बजट से अपने चुनावी वादों को पूरा करने जहां कोशिश रही ,वहीं वोट फैक्ट्री( किसान, गरीब, महिलाओं और ग्रामीण वोटर) को लुभाने की भरपूर कोशिश बजट मे स्पष्ट देखी जा सकती है।
वोटों के लिहाज से किसान भारत का सबसे बडा़ वर्ग है और आज भी भारत की साठ प्रतिशत जनसंख्या खेती किसानी से ही अपना गुजर बसर कर रही है।लेकिन सरकारें अभी तक इनको लुभाने के लिए कर्जमाफी जैसे हठकंडे अपनाती रही है।लेकिन भाजपा सरकार अपने अंतिम बजट से इस वर्ग को अपने पक्ष मे करने के लिए तमाम लुभावनी घोषणाएं की है
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1- 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य.
2- कम लागत में अधिक फसल उगाने पर ज़ोर, किसानों को उनकी उपज का अधिक दाम दिलाने पर फोकस
3-उपज पर लागत से डेढ़ गुना अधिक दाम मिले, इस पर फोकस.
4- 2000 करोड़ रुपये की लागत से कृषि बाज़ार.
5- कृषि प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए 1400 करोड़ रुपये.
6- 500 करोड़ रुपये की लागत से ऑपरेशन ग्रीन.
7- 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाने का ऐलान.
8- लघु और सीमांत किसानों के लिए ग्रामीण कृषि बाजारों का विकास किया जाएगा.
9-गांवों में 22 हज़ार हाटों को कृषि बाजार में तब्दील किया जाएगा.
10- देश में कृषि उत्पादन रेकॉर्ड स्तर पर है. साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करेंगे.
11-खरीफ़ की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को 1.5 गुना किया गया है.
12- मछुआरों और पशुपालकों को भी किसानों की तरह क्रेडिट कार्ड दिए जाएंगे.
13- कृषि बाजार के विकास के लिए 2,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
14- ऑर्गनिक खेती को और बढ़ावा दिया जायेगा. महिला समूहों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा.
15- मछली पालन और पशुपालन व्यवसाय में 10000 करोड़ रुपये देकर ग्रामीण क्षेत्रो में जनता की आय बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.
वोट बैंक के लिहाज से महत्त्वपूर्ण देश की आधी आबादी को तीन तलाक कानून के बाद बजट द्वारा एक बार फिर लुभाने की कोशिश की गई।महिलाओं के लिए हुई क्या-क्या घोषणाएं:
1-उज्ज्वला योजना के तहत तीन करोड़ नए मुफ़्त गैस कनेक्शन दिए जाने की घोषणा की गई।इस योजना कीउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मे भाजपा की जीत मे महत्वपूर्ण भूमिका रही।
2- स्वच्छ भारत मिशन के तहत छह करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ शौचालयों के निर्माण की योजना.
3-ग़रीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 51 लाख नए आवासों की घोषणा।महिला को प्राथमिकता।
4- महिलाओं के लिए शुरुआती तीन सालों के लिए ईपीएफ़ में शामिल होने के लिए ज़रूरी मूल वेतन का 12 फ़ीसदी योगदान घटाकर 8 फ़ीसदी किया गया, इससे प्रतिमाह हाथ में आने वाली आमदनी बढ़ेगी.
5-स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करते हुए 1.5 लाख मेडिकल सेंटर खोलने का एलान.
- सुकन्या समृद्धि में अच्छी सफलता को देखते हुए इसे और बढ़ाने पर ज़ोर।
2004 मे इंडिया साइनिंग से भाजपा सबक सीख चुकी है साथ ही हाल मे हुए गुजरात चुनाव भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों खूब पिटी भी है।बजट मे ग्रामीण विकास की घोषणाओं को देखे तो यह स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा शहर से गांवों की ओर रू ख कर ली है।करना भी चाहिए क्योंकि आज भी भारत की सत्तर फीसदी आबादी गांव मे रहती है।
सरकार ने 2018-19 के आम बजट में ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे और आजीविका साधनों के सृजन के लिए 14.34 लाख करोड़ रूपये व्यय करने का प्रस्ताव किया है. संसद में बजट भाषण पढ़ते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे 321 करोड़ श्रम दिवस का रोजगार सृजित होगा।जेटली ने कहा कि खेती से जुड़े कार्यकलापों और स्व-रोजगार के कारण रोजगार के अलावा, इस खर्च से 3.17 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों, 51 लाख नए ग्रामीण मकानों, 1.88 करोड़ शौचालयों का निर्माण होगा. उन्होंने बताया कि इसके अलावा इससे कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा और 1.75 करोड़ नए परिवारों को बिजली के कनेक्शन प्राप्त होंगे।जेटली ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि यह सरकार के ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के मिशन से प्रेरित है. केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरट मामलों के मंत्री जेटली ने कहा कि आगामी बजट के लिए किए गए यह प्रस्ताव देश में ग्रामीण क्षेत्रों में जीविका के साधन, कृषि और संबद्ध कार्यकलापों और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं के निर्माण पर सरकार के और अधिक धन राशि खर्च करने के संकेत को दिखाते हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें. जेटली ने 2018-19 के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम का आवंटन बढ़ाकर 5750 करोड़ रूपये किया है जो चालू वित्त वर्ष में 4,500 करोड़ रुपये है.
बजट में महिलाओं स्वयं सहायता समूह को दिया जाने वाला ऋण 2016-17 में बढ़ाकर लगभग 42,500 करोड़ रुपये किया गया था. जेटली ने कहा कि सरकार को आशा है कि मार्च 2019 तक स्वयं सहायता समूहों की ऋण राशि बढ़ाकर 75,000 करोड़ रूपये कर दी जाएगी. इसके अलावा कृषि क्षेत्र में पिछड़े 96 जिलों में सिंचाई के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 2600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
इस प्रकार सरकार का ग्रामीण क्षेत्र में कुल 14.34 लाख रुपये व्यय करने का प्रस्ताव है. इसमें 11.98 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजटीय और गैर-बजटीय संसाधन शामिल हैं.
वोटबैंक के लिहाज से भारत का गरीब वर्ग भी महत्वपूर्ण है।सरकार का लक्ष्य बजट मे किसानों के बाद गरीबों पर फोकस रहा।इस बार के बजट में सरकार ने गरीबों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है. गरीबों को अपने साथ जोड़ने के कमकसद से शुरू की गई उज्ज्वला योजना को लेकर वित्त मंत्री ने अपनी सरकार की पीठ थपथपाई.
आने वाले वित्तीय वर्ष में उज्ज्वला योजना का फायदा उठाने वाली महिलाओं की तादाद 5 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है. दरअसल, गरीब परिवार में मुफ्त गैस कनेक्शन देने की यह योजना काफी लोकप्रिय हो रही है. सरकार को लगता है कि इस योजना का दायरा बढाकर वह गरीब परिवार में अपनी पैठ और बढा सकती है।गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा मास्टर स्ट्रोक वोटबैंक के लिहाज भविष्य मे महत्वपूर्ण हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य की समस्या सबसे बडी समस्या है. आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य पर बढ़ रहे खर्चे की मार गरीबों पर ही सबसे ज्यादा पड़ती है. इस बार बजट में स्वास्थ्य को लेकर सरकार ने बड़ी घोषणा करते हुए देश के गरीबों को 5 लाख रुपए तक की स्वास्थ्य बीमा योजना देने की घोषणा की।वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस योजना से दस करोड़ परिवारों को फायदा होगा. मतलब देश की 50 करोड़ आबादी इस स्वास्थ्य योजना का लाभ उठा सकेगी।सरकार ने इस बार बजट में हेल्थ वेलनैस सेंटर के लिए 1200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. जबकि लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए 1.5 लाख आरोग्य सेंटर खोले जाएंगे.
किसान ,गरीब, महिला और ग्रामीण आबादी पर इस बजट मे विशेष प्रावधान है और ये चारो समूह कुल वोटबैंक का 80 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते है।सरकार के अंतिम वर्ष के बजट मे इस प्रकार के प्रयासो को कल्याणकारी कम वोटबैंक की फैक्ट्री को लुभाने की कोशिश के रूप मे भी देखा जा सकता है।