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योगी और मुस्लिम सुरक्षा पर मन की बात मेरे साथ-अजय श्रीवास्तव एडिटर इन चीफ सत्यमेव जयते लाइव_यूपी/उत्तराखण्ड का सर्वाधिक लोकप्रिय वेब पोर्टल न्यूज़

हाल ही में गोरखपुर मे भाजपा के मुस्लिम चेहरे और राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा था कि जब...

👤 Ajay2017-03-21 18:05:40.0
योगी और मुस्लिम सुरक्षा पर मन की बात मेरे साथ-अजय श्रीवास्तव एडिटर इन चीफ सत्यमेव जयते लाइव_यूपी/उत्तराखण्ड का सर्वाधिक लोकप्रिय वेब पोर्टल न्यूज़
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हाल ही में गोरखपुर मे भाजपा के मुस्लिम चेहरे और राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा था कि जब योगी आदित्यनाथ मुझसे प्यार करते है तो भला अन्य मुस्लिमों से नफरत कैसे कर सकते है। उन्होंने दावा किया है कि भारत के मुस्लिमों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा की गारंटी योगी आदित्यनाथ ही है। लेकिन क्या उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत के मुसलमानों की सोच भी शाहनवाज हुसैन की तरह ही है?हालांकि गोरखपुर के कुछ स्थानीय मुस्लिमों ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाएं जाने पर खुशी के इजहार करने के साथ बधाई दी है लेकिन शाहनवाज हुसैन के दावे से निश्चित रूप से सभी मुसलमान सहमत नही हो सकते हैं क्योंकि आदित्यनाथ की पृष्ठभूमि कभी ऐसी नहीं रही है।
राजनीति में योगी आदित्यनाथ की पहचान फायरब्रांड हिंदू नेता की रही है, साथ ही उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया,उनमे राम मंदिर, लव जिहाद, मुस्लिमों की बढती जनसंख्या, अन्य पार्टियों द्वारा किए जा रहे मुस्लिम तुष्टीकरण का विरोध आदि लगभग मुस्लिम विरोधी ही माने जा सकते है। हाल ही मे उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाकों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संवेदनशील बताकर सभी मुस्लिमों के देशभक्ति पर प्रश्न चिन्ह भी लगाया था। इसके अलावा समय-2 पर उनके द्वारा दिए गये बयानों पर भी गौर करने की जरूरत है जो विवादास्पद रहें है! योगी के विवादित बयानों की लिस्ट लंबी है.

1. जून 2016: "जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने से कोई नहीं रोक सका तो मंदिर बनाने से कौन रोकेगा."
2. अक्टूबर 2016: "मूर्ति विसर्जन से होने वाला प्रदूषण दिखता है लेकिन बकरीद के दिन हज़ारों निरीह पशु काटे गए काशी में, उनका ख़ून सीधे गंगा जी में बहा है क्या वो प्रदूषण नहीं था?"
3. अक्टूबर 2015: दादरी हत्याकांड पर योगी ने कहा - "यूपी कैबिनेट के मंत्री आजम ख़ान ने जिस तरह यूएन जाने की बात कही है, उन्हें तुरंत बर्ख़ास्त किया जाना चाहिए. आज ही मैंने पढ़ा कि अख़लाक़ पाकिस्तान गया था और उसके बाद से उसकी गतिविधियां बदल गई थीं. क्या सरकार ने ये जानने की कभी कोशिश की कि ये व्यक्ति पाकिस्तान क्यों गया था? आज उसे महिमामंडित किया जा रहा है."
4. जून 2015: "जो लोग योग का विरोध कर रहे हैं उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए. जो लोग सूर्य नमस्कार को नहीं मानते उन्हें समुद्र में डूब जाना चाहिए."
5. अगस्त 2015: "मुस्लिमों की जनसंख्या तेजी से बढ़ना खतरनाक रुझान है, यह एक चिंता का विषय है, इस पर केंद्र सरकार को कदम उठाते हुए मुसलमानों की आबादी को कम करने की कोशिश करनी चाहिए."
6. फरवरी 2015: "अगर उन्हें अनुमति मिले तो वो देश के सभी मस्जिदों के अंदर गौरी-गणेश की मूर्ति स्थापित करवा देंगे. आर्यावर्त ने आर्य बनाए, हिंदुस्तान में हम हिंदू बना देंगे. पूरी दुनिया में भगवा झंडा फहरा देंगे. मक्का में ग़ैर मुस्लिम नहीं जा सकता है, वैटिकन में ग़ैर ईसाई नहीं जा सकता है. हमारे यहां हर कोई आ सकता है."
7. अगस्त 2014: लव जेहाद' को लेकर योगी का एक वीडियो सामने आया था. इसमें वे अपने समर्थकों से कहते सुनाई दे रहे थे कि हमने फैसला किया है कि अगर वे एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन करवाते हैं तो हम 100 मुस्लिम लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाएंगे. बाद में योगी ने वीडियो के बारे में कहा कि मैं इस मुद्दे पर कोई सफ़ाई नहीं देना चाहता.

चूंकि 'सुरक्षा' का दायरा बहुत बड़ा होता है ।इसको केवल
'जीवन की रक्षा' तक सीमित नही किया जा सकता है। सुरक्षा के तात्पर्य सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनैतिक सभी तरह की सुरक्षा से होता है।403 विधानसभा मे से एक भी मुसलमान को टिकट न देना और योगी आदित्यनाथ जैसे कट्टर हिन्दुत्व वादी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनना निश्चित रूप से मुस्लिम समाज स्वयं को त्वरित रूप से सुरक्षित नही मान सकता है। राम मंदिर का निर्माण, लव जिहाद,तीन तलाक, मुसलमानों की बढती जनसंख्या पर रोक ,भारत माता की जय और वंदेमातरम् जैसी बातें निश्चित रूप मे मुस्लिम समाज को अपने सामाजिक एवं धार्मिक ढांचे को लेकर असुरक्षा की भावना बढी है।
यह सच है कि योगी आदित्यनाथ की छवि एक कट्टर हिन्दू नेता की रही है लेकिन एक पीठाधीश्वर के बोल एवं कार्य और संवैधानिक पद पर बैठने वाले व्यक्ति के बोल एवं कार्य को मुस्लिम समाज को एक मान कर पूर्वाग्रह से ग्रसित रहने की जरूरत नहीं है साथ ही उन्हें भारत के संविधान के प्रति आस्था रखने की जरूरत है।
भाजपा के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे को भले ही उत्तर प्रदेश मे एक भी मुसलमान न दिखा हो, लेकिन प्रधानमन्त्री बनने के पूर्व कट्टर हिन्दू नेता की छवि रखने वाले नरेन्द्र मोदी ने अपने किसी भी जनपयोगी योजनाओ मे जाति- धर्म के विभेद को नहीं अपनाया। योगी आदित्यनाथ के पहले आदेश को लें जिसमें उन्होंने ने उत्सव के नाम पर उपद्रव न करने का आदेश जारी किया है जिसका सीधा अर्थ कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की किसी को छूट नही है चाहे वह समर्थक हो या विरोधी। अत: पूरे मुस्लिम समाज को समय की प्रतीक्षा करने की जरूरत है न कि पूर्वाग्रहों से ग्रसित होकर स्वयं को, स्वयं के ही देश मे असुरक्षित मानने की जरूरत नही है।