Home » यू पी/उत्तराखण्ड » चंदौली - योगी के बाद कौन होगा गोरखपुर का सांसद _विनय कुमार की रिपोर्ट

चंदौली - योगी के बाद कौन होगा गोरखपुर का सांसद _विनय कुमार की रिपोर्ट

गोरक्षनाथ मंदिर के महंत और गोरखपुर के सांसद यागी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बन जाने के बाद यह सवाल...

👤 Ajay2017-03-19 14:24:15.0
चंदौली - योगी के बाद कौन होगा गोरखपुर का सांसद _विनय कुमार की रिपोर्ट
Share Post



गोरक्षनाथ मंदिर के महंत और गोरखपुर के सांसद यागी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बन जाने के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर गोरखपुर का सांसद कौन हागा? इसलिए भी कि इस संसदीय क्षेत्र से उन्ही की तरह एक तरफा जीत दर्ज करानेे वाला चेहरा आखिर कौन हो सकता है? योगी आदित्यनाथ 1998 से लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद चुने जाते रहे हैं. सिर्फ एक बार स्व. यमुना निषाद ने उन्हें सपा के टिकट पर कड़ी टक्कर दी थी. वैसे 2009 में लोकसभा का चुनाव वर्तमान भाजपा सांसद और दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी भी सपा के टिकट पर लड़कर हार चुके हैं. भोजपुरी स्टार तिवारी को तब बडी मुश्किल से 50 हजार वोट पर ही संतोष करना पडा था.

केवल योगी ही नही डिप्टी सीएम बने कौशांबी के सांसद केशव प्रसाद मौर्या को लेकर भी यही कठिनाई है. वजह यह है कि इन दोनों के बारे में ही विधानपरिषद के लिए सोचा जाना इसलिए मुश्किल है क्योंकि विधानपरिषद में मई 2018 तक कोई सीट रिक्त होने वाली नहीं है. जबकि योगी और केशव के लिए छह माह के भीतर ही दोनों सदनों में से किसी एक सदन का सदस्य होना अनिवार्य है. ऐसे में दोनों के लिए कोई विधानसभा सीट रिक्त कराना पड़ेगा. लेकिन लोकसभा की रिक्त सीट से ऐसे उम्मीदवार की भी खोज जरूरी है, जो दोनों सीटें जीत सके.

सबसे बडी चुनौती गोरखपुर संसदीय सीट की है. इस सीट पर दशकों से गोरक्षनाथ के महंत का कब्जा होता आया है. चाहे स्व. दिग्विजय नाथ रहे हों, स्व अवैद्यनाथ या उसके बाद योगी आदित्यनाथ रहे हों. माना जाता है कि इस सीट से मंदिर के मंहतों की जीत का बड़ा कारण गोरक्षपीठ रहा है. केवल गोरखपुर ही नही, पूर्वांचल और नेपाल तक इस पीठ का बडा महत्व है. पीठ के श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में है.


लेकिन योगी आदित्यनाथ के इतर जब किसी और को इस संसदीय सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा तो क्या उसका भी उतना ही महत्व रहेगा जितना योगी का है? इस सवाल के सापेक्ष उत्तर ढूंढ पाना आसान नहीं है.

बावजूद इसके योगी के लिए उनके ही संसदीय सीट में से कोई न कोई विधानसभा क्षेत्र तलाशना होगा. इसके लिए दो विधानसभा क्षेत्र की चर्चा शुरू होे गई है. एक गोरखपुर सदर तथा दूसरे सहजनवा. सहजनवा से गोरखपुर विश्वविद्वालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शीतल पांडेय पहली बार विधायक चुने गए हैं, जबकि गोरखपुर सदर सीट से डॉ. राधामोहन अग्रवाल चार बार से विधायक हैं. जाहिर है दोनों में से किसी की भी सीट यदि खाली करवाई गई तो उसके गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से योगी की जगह चुनाव लड़ाने की ही शर्त पर, लेकिन राधामोहन अग्रवाल या शीतल पांडेय क्या ऐसा चेहरा हो सकते हैं जो गोरखपुर संसदीय सीट जीतकर योगी को झोली में डाल सकते हैं? यह बडा सवाल है और इस पर मंथन भी शुरू हो गया है.

इस बात पर मंथन है कि योगी की जगह राधामोहन या शीतल दोनों के अलावा तीसरा कौन चेहरा हो सकता है, जिसे गोरखपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा सके, चुनाव में योगी को श्रद्धाभाव से वोट मिलते हैं, लेकिन यह श्रद्धाभाव उनके संभावित उत्तराधिकारी में भी यह जरूरी नहीं है. गोरखपुर विभिन्न जातीय समूह के मतदताओं से मिश्रित चुनाव क्षेत्र है, जहां का जातिय अंकगणि योगी और उसके पहले दिग्विजय नाथ तथा अवैद्वनाथ ही तोड सकते थे. इस जातीय अंकगणित को तोड सकने वाले उम्मीदवार की भी तलाश है. सहजनवा के विधायक शीतल पांडेय तथा गोरखपुर सदर के विधायक अग्रवाल दोनों में शायद यह क्षमता नहीं है.

ऐसी स्थित में एक तीसरे पहलू पर भी मंथन हो रहा है. वह यह है कि गोरखपुर सदर या सहजनवा या कोई और सीट जो भी योगी के लिए खाली हो, उस सीट के विधायक को किसी सम्मानजनक पद की ताजपोसी कर गोरखपुर संसदीय सीट से किसी तीसरे उम्मीदवार के नाम पर भी विचार हो सकता है. लेकिन इस तीसरे उम्मीदवार का नाम उतना ही सस्पेंश भरा होगा, जितना योगी का सीएम के लिए चयन था. इस संबंध में योगी निकटवर्ती विधायक तथा हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि योगी जी जिस सीट से चाहे, चुनाव लड़ सकते हैं. जहां तक उनकी जगह गोरखपुर संसदीय सीट से उम्मीदवार का सवाल है तो मै सिर्फ यह कह सकता हूं कि योगी जी की चरणपादुका रखकर जो भी चुनाव लडेगा, वही गोरखपुर का सांसद होगा.