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बहराइच :-सुप्रीम कोर्ट ने अखिलेश सरकार के मंत्री की मुसीबतें बढ़ा दी हैं_आलोक आनन्द श्रीवास्तव की ख़ास रिपोर्ट

बहराइच:- अखिलेश सरकार में मंत्री गायत्री प्रजापति की मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं. मुलायम सिंह के...

👤 Ajay2017-03-06 15:02:40.0
बहराइच :-सुप्रीम कोर्ट ने अखिलेश सरकार के मंत्री की मुसीबतें बढ़ा दी हैं_आलोक आनन्द श्रीवास्तव की ख़ास रिपोर्ट
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बहराइच:- अखिलेश सरकार में मंत्री गायत्री प्रजापति की मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं. मुलायम सिंह के बहुत खास माने जाने वाले प्रजापति को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से मना कर दिया है. गैंगरेप के आरोपी प्रजापति ने कोर्ट से सज़ा पर स्टे लगाने की अपील की थी. सोमवार को अदालत ने अपने नए आदेश में कहा है कि प्रजापति तुरंत अदालत के सामने हाज़िर हों.
अखिलेश सरकार में मंत्री रहे प्रजापति पिछले 4-5 दिनों से चर्चा में हैं. हाल ही में खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि अखिलेश कैबिनेट में मंत्री रहे गायत्री बलात्कार के आरोपों की वजह से देश से भागने की फिराक में हैं. ऐसे में सुरक्षा बलों और देश के सभी एयरपोर्ट्स को अलर्ट कर दिया. पासपोर्ट इमीग्रेशन डिपार्टमेंट भी गायत्री पर नजर बनाए हुए है. प्रजापति की सुरक्षा में लगे पुलिसवालों में से आधा दर्जन हटा दिए गए हैं.
सपा से अमेठी विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ रहे गायत्री प्रजापति पर आरोप लगा है कि उन्होंने तीन साल पहले मिलने आई एक महिला की चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ रेप किया और तस्वीरें भी लीं. तस्वीरों के जरिए गायत्री ने कई बार महिला को ब्लैकमेल और रेप किया. गायत्री के इस रूप से बेइंतेहा डरी उस महिला ने अपनी मां के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. ये काम एक बार में नहीं हुआ. कई चक्कर लगाने पड़े.
प्रजापति के विवाद में यूपी पुलिस भी चपेट में हैं. विक्टिम का कहना है कि यूपी पुलिस दिल्ली आकर उनके ऊपर अपने मन-मुताबिक शिकायत दर्ज करने का दबाव बना रही है.
खुद रेप केस में फंसे पड़े गायत्री मायावती को ताना मार चुके हैं, 'उन्हें समझ नहीं आएगा महिलाओं का दर्द, क्योंकि उन्होंने कभी किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया.'
अब इन्हें कौन समझाए कि महिलाओं का सबसे बड़ा दर्द तो इन जैसे मर्द हैं, जो औरतों को अपनी जागीर समझ बैठे हैं. खुद तो दो-दो रेप मामलों में उलझे हैं और बात कर रहे हैं महिलाओं के दर्द की.
गायत्री का इतिहास देखा जाए, तो ये साफ़ दिखता है कि रेप मामलों में उलझे रहना इनका फैमिली बिज़नेस है. अरे भइया मजाक नहीं कर रहे हैं. अभी पिछले साल ही इनके बेटे अनुराग प्रजापति के खिलाफ़ भी नाबालिग के साथ छेड़खानी का केस दर्ज हुआ था. अब हम भी इतना कितना कपड़ा फाड़ें! इसलिए कह दिया छेड़खानी. पर असल में तो रेप का मामला दर्ज हुआ था.
गायत्री प्रजापति सपा के वो नेता हैं, जिनकी खबर लिखते-लिखते हमें शर्म आ जाती है. पर क्या करें! काम है हमारा आपको गायत्री के गुणों से वाकिफ कराना.
ये शख्स जो खुद को नंदी, मुलायम सिंह यादव को शिव और अखिलेश यादव को गणेश कहते हैं, बड़े संस्कारी हैं. अखिलेश यादव ने जब इन्हें पार्टी से निकाल दिया था, तब ये मुलायम की कृपा से पार्टी में वापस आ गए थे. उस मौके पर गायत्री ने सार्वजनिक जगह पर पचासों लोगों के बीच मुलायम के कदमों में लोटकर आभार जताया था. इनकी भाषा में उसे पैर छूना कहते हैं.
ये संस्कारी होने के साथ-साथ रुपइयों के भी धनी हैं. एक हज़ार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है इनके पास. तेरह कंपनियों के मालिक हैं. इन कंपनियों में उनके पूरे खानदान ने डेरा बसा रखा है. वैसे ये खानदानी अमीर नहीं हैं. ये वो हैं, जो कम समय में ज्यादा लक्ष्मी कमा ले गए. 2002 में गरीबी रेखा से भी नीचे थे. बीपीएल कार्ड था इनके पास. चुनाव लड़ते समय पूरे लाख रुपए भी नहीं थे इनके पास.
लेकिन बंदे ने 2009 के बाद से जो रफ्तार पकड़ी है न, आई शप्पथ अंबानी फेल हैं. चार साल में हजार करोड़. अब हम जैसे लोग क्या जानें कि ये चाटुकारिता का प्रमाण है या संस्कारी और मेहनती होने का. आप खुद ही तय कर लीजिए.
गायत्री प्रजापति में कोई बात तो ज़रूर है. भ्रष्टाचार और रेप जैसे मामलों में पीएचडी किया इंसान आज भी क्लीन इमेज रखने वाले अखिलेश यादव के नाम के साथ हिलगा हुआ है. 'आप' के मंत्री पर जब ऐसे आरोप लगे थे, तो अरविन्द केजरीवाल ने उसे पार्टी से निकाल दिया था. लेकिन अखिलेश ने क्या किया? पार्टी से निकला तो सही, लेकिन वापस शामिल भी कर लिया.
अखिलेश भले इसे अपनी सियासी मजबूरी कहें, लेकिन अमेठी के मंच से उन्होंने गायत्री प्रजापति के लिए वोट मांगे थे. मुंशी प्रेमचंद अखिलेश जैसों के लिए ही लिख गए हैं, 'क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे?'
अखिलेश को भी झांकी सजाना बहुत अच्छे से आता है. अखिलेश के अमेठी दौरे पर गायत्री को सख्त हिदायत थी कि वो स्टेज पर न आएं. मतलब जो कैंडिडेट है, वही नीचे बैठा हुआ था. रोते हुए. आंसुओं को लेकर इस बंदे की टाइमिंग आप बीट नहीं कर सकते. अमेठी में वोटिंग हो चुकी है. कहीं गायत्री के साथ-साथ अखिलेश को भी न रोना पड़े.