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मऊ:- पैरोल पर जेल से आये मुख्तार नहीं कर सकेंगे चुनाव प्रचार _ अरुण सिंह भीमा की रिपोर्ट

मऊ/दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार को मऊ विधायक मुख्तार अंसारी की पेरोल की अर्जी मंजूर कर ली। जज...

👤 Ajay2017-02-17 12:43:09.0
मऊ:- पैरोल पर जेल से आये मुख्तार नहीं कर सकेंगे चुनाव प्रचार _ अरुण सिंह भीमा की रिपोर्ट
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मऊ/दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार को मऊ विधायक मुख्तार अंसारी की पेरोल की अर्जी मंजूर कर ली। जज एसके शर्मा ने उन्हें अपने प्रचार अभियान के लिए कुल 15 दिन की पेरोल दी है। आदेश में उन्होंने यह भी कहा है कि मुख्तार सिर्फ अपने निर्वाचन क्षेत्र मऊ सदर में ही प्रचार करेंगे। मऊ सदर क्षेत्र की सरहद वह पार नहीं करेंगे। पेरोल की अवधि चार मार्च तक की है। पेरोल मिलने से उनके समर्थक उत्साहित हो गए हैं। उनका मानना है कि मुख्तार की जीत अब और पक्की हो गई है। पैरोल पर आने से मऊ की घोसी सीट से उनके बेटे अब्बास अंसारी तथा गाजीपुर की मुहम्मादबाद सीट से चुनाव मैदान में फिर उतरे मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के प्रचार अभियान को भी बल मिलेगा। मालूम हो कि अंसारी कुनबा बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहा है। भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में जेल में निरुद्ध मुख्तार को पिछले लोकसभा चुनाव में भी सीबीआई कोर्ट ने पेरोल दी थी। तब वह अपने दल कौएद से मऊ की घोसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे थे लेकिन प्रदेश की अखिलेश सरकार की भृकुटी उन पर तनी थी। लाख प्रयास के बाद भी वह अपने प्रचार के लिए घोसी संसदीय क्षेत्र में नहीं पहुंच पाए थे। बीच रास्ते से ही पुलिस फोर्स उनको लेकर लौट गई थी। इस बार क्या होगा। अगर पेरोल पर रिहा करने में आनाकानी हुई तो मुख्तार पिछली बार की तरह इस बार भी पेरोल आदेश की अवहेलना का मामला लेकर दोबारा कोर्ट जा सकते हैं। वैसे अंसारी बंधुओं को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश की तल्खी कायम है। पता चला है कि सीबीआई कोर्ट का पेरोल का आदेश 17 फरवरी को लखनऊ प्रशासन को तामिल करा दिया जाएगा। मालूम हो कि इन दिनों मुख्तार लखनऊ जेल में ही निरुद्ध हैं।