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बहराइच....तो यहाँ शबाब और कबाब पर चुनाव आयोग का हल्ला बोल_आनन्द प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट

बहराइच । पाँचवे चरण के मतदान में अब दो सप्ताह का समय शेष है । चुनावी मौसम में नेताओं की चौखटों का...

👤 Ajay2017-02-13 11:44:15.0
बहराइच....तो यहाँ शबाब और कबाब पर चुनाव आयोग का हल्ला बोल_आनन्द प्रकाश गुप्ता की रिपोर्ट
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बहराइच । पाँचवे चरण के मतदान में अब दो सप्ताह का समय शेष है । चुनावी मौसम में नेताओं की चौखटों का हाल बड़ा ही मजेदार है । कमोबेश सभी दलों के प्रत्याशियों की चौखट पर शबाब और कबाब के शौक़ीनो का लम्बा - लम्बा हुजूम इस देहरी से उस देहरी पर काले साये की तरीके से सुबह शाम मंडराता हुआ दिखाई पड़ सकता है । नेता जी अपने लखिया कार में बैठकर अपने शुभचिंतकों को बड़े बारीकी अंदाज में बताते हैं कि 28 लाख रुपये के चुनावी खर्च को समेट कर रखना है लेकिन खान पान के चाहने वालों का दौर भी शुरू करना मजबूरी है । जिसके लिए प्रत्याशियों को जुगाड़ के द्वारा खर्च को संयमित करने का कार्य भी किया जा रहा है । वैसे तो लोगों में इस बात की चर्चा भी खूब है कि नोटबंदी के चलते प्रत्याशियों को वाहन खाना प्रकाशन सामग्री का हिसाब मैं बिल के देना होगा । जिसके चलते चुनावी रणभेरी की दुंदुभी बजने के बाद भी प्रचार में कमी आई हुई है । प्रत्याशी चुनाव आयोग के डण्डे से डरे हुए हैं किन्तु चुनावी रण में भिड़ रहे योद्धा मन ही मन मंत्रमुग्ध भी हैं । भोपुओं की आवाज से मुक्त आदर्श चुनाव होने की राह पर दौड़ रहा है । चुनाव की चर्चा लोगों में पिछले एक वर्ष से चली आ रही है । नववर्ष के प्रथम सप्ताह में चुनाव आयोग ने जैसे ही अपनी आमद दर्ज कराई तो चर्चा हिलोरे लेने लगी । कभी प्रत्याशी की जीत हार तो कभी राजनैतिक दलों द्वारा भगोड़े और थोपे गए प्रत्याशियों से नाराजगी भरे माहौल को भी जिले की सातों विधानसभा सीटों पर देखने दिखाने और रूठों को मनाने का दौर भी थम नही रहा । लेकिन इन सब के बावजूद चुनाव में कम खर्च होना प्रत्याशियों के माथे पर बल डाल रहा है । उम्मीदवारों को जहाँ चुनावी कार्यक्रम से फुर्सत नही है वही इस झंझटी काम को किसी जानकार मुनीम की आवश्यक्ता है । बड़े लड़ाका दलों के लोगों को चार्टेड एकाउन्टेन्ट की जरूरत है । जिससे वे घालमेल की बारीकियां समझाकर उनके बजट को संयमित कर सकें । गलियों का सूनापन साफ़ सुथरी दीवार बिल्ला और झंडा न मिलने से बच्चों का उल्लास भी इस चुनाव में शांति की राह पकड़े है । तभी तो दावतों का दौर अभी पूरे शबाब पर नही है ।