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पीलीभीत:- कैद में कैसे आया आदमखोर बाघ?-पढ़े पूरी कहानी_हमारे संवाददता विकास सक्सेना की जुबानी_लाइव

पीलीभीत :-। पीलीभीत टाईगर रिजर्व से पिछले चार माह पूर्व निकले बाघ को आज वन विभाग की टीमों ने...

👤 Ajay2017-02-11 14:00:51.0
पीलीभीत:- कैद में कैसे आया आदमखोर बाघ?-पढ़े पूरी कहानी_हमारे संवाददता विकास सक्सेना की जुबानी_लाइव
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पीलीभीत :-। पीलीभीत टाईगर रिजर्व से पिछले चार माह पूर्व निकले बाघ को आज वन विभाग की टीमों ने ट्रेंकुलाइज करने में सफलता प्राप्त कर ली। हालांकि बाघ ने एक हाथी पर हमला भी किया। आक्रोशित ग्रामीणों ने बाघ को जलाकर मारने का प्रयास भी किया। ग्रामीणों ने वन कर्मियों पर पथराव भी किया। ग्रामीण हमलावर हत्यारे बाघ को मौत के घाट उतारने की मांग कर रहे थे। मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक सहित वन विभाग के सभी अधिकारी मौके पर रहे। आज तडके ही इस बाघ ने एक चौकीदार को अपना निवाला बनाकर सातवां शिकार किया था। ग्रामीणों ने वन कर्मियों पर भी हमला किया और जमकर गन्ने बजाये। डीसीएम से बाघ को ले जाने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने उसकी चाबी निकाल ली, किसी तरह पिंजरे को ट्रेक्टर ट्राली पर लाद कर उसे मुस्तफाबाद ले जाया गया। अब इस बाघ को परीक्षण के बाद लखनऊ चिडियाघर भेज दिया गया। इसके साथ ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक तथा लखनऊ से आये अधिकारियों की टीम भी लखनऊ रवाना हो गए।
आज सुबह कलीनगर तहसील के पास बाघ ने चौकीदार गंगाराम को अपना निवाला बनाने के बाद ही वन विभाग की सभी छह टीमें उसकी तलाश में लग गई। इन टीमों ने हत्यारे बाघ की तलाश के लिए ट्रेकिंग शुरू कर दी। पता चला कि बाघ नवदिया सुखदासपुर में एक गन्ने के खेत में है। इस पर दो हाथी और सभी छह टीमें मौके पर पहुंच गई। बाघ को पकडने के लिए हाथियों से टीम गई तो बाघ ने एक हाथी गंगाकली पर हमला कर दिया। हमला होने के कारण आपरेशन में बाधा आई।
इसके बाद मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उमेंद्र शर्मा ने निर्देश दिये कि चारों हाथियों को आपरेशन में लगा दिया। फिर क्या था डॉटर शूटरों की टीम भी पहुंच गई। गन्ने के खेत में जेसीबी भी चलाई गई। इसके बाद चारों हाथियों को खेत में घुसाया गया। इसमें डॉ.उत्कर्ष शुक्ला की टीम जिसमे डब्लयूटीआई के डॉ.प्रेमचंद्र पांडेय और डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल की टीम ने बाघ को टें्रकुलाइज गन से डॉट से बाघ को अपना शिकार बना लिया। जैसे ही उसे ट्रेंकुलाइज किया तो पूरी वन विभाग की छह टीमों में खुशी की लहर दौड गई। उसके बेहोश होने का इंतजार किया गया।
आधे घंटे के बाद सभी टीमों ने बेहोश बाघ को पिंजरे में डाल दिया। फिर क्या था ग्रामीणों ने बेहोश बाघ को मारने की बात कह कर हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने पथराव भी किया। इतना ही बाघ के पिंजरे के बाहर खडे वन कर्मियों पर भी गन्ने से हमला कर दिया। इन लोगों ने विश्व प्रकृति निधि के डॉ.मुदित गुप्ता, डॉउत्कृष शुक्ला, उनके सहयोगी कमाल, डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल, एसडीओ केपी सिंह पर हमला कर दिया। ग्रामीण बाघ को मारने के लिए हंगामा करते रहे। कुछ ने पथराव भी किया। जब बाघ को पिंजरे सहित डीसीएम में डाला तो वे लोग डीसीएम की चाबी भी निकाल ले गए। बाद में किसी तरह ट्रेक्टर ट्राली लखनऊ ले जाने का आदेश कर दिया। देर शाम बाघ को लखनऊ रवाना कर दिया गया है।
बाघ के साथ ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उमेंद्र, वन संरक्षक पीपी िंसंह, डॉ.उत्कर्ष शुक्ला सहित आयी टीम भी लखनऊ रवाना हो गई है। इसके साथ ही एक आतंक का आज समापन हो गया।