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मऊ:- आठ दिन के पैरोल पर आयेगें मुख्तार_बसपा का दामन थामें हैं बाहुबली मुख़्तार_अरुण सिंह भीमा की रिपार्ट

मऊ(अरुण सिंह भीमा) मऊ के बाहुबली बिधायक लखनऊ जेल से नामांकन करने मऊ आने की तैयारी किया जा रहा हैं...

👤 Ajay9 Feb 2017 9:44 AM GMT
मऊ:- आठ दिन के पैरोल पर आयेगें  मुख्तार_बसपा का दामन थामें हैं बाहुबली मुख़्तार_अरुण सिंह भीमा की रिपार्ट
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मऊ(अरुण सिंह भीमा) मऊ के बाहुबली बिधायक लखनऊ जेल से नामांकन करने मऊ आने की तैयारी किया जा रहा हैं ।अपने वकील से परामर्श कर पैरोल लेने का कोर्ट में अर्जी दे चुके हैं ।
सियासी तकाजा वही। सत्ता के हालात वही। क्या नतीजा भी वही रहेगा। यह बात बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के संदर्भ में हो रही है। मुख्तार अंसारी विधानसभा की अपनी मऊ सदर सीट से इस बार बसपा के उम्मीदवार हैं। फिलहाल वह लखनऊ की जेल में कैद हैं। जाहिर है कि वह कोर्ट से अपने प्रचार अभियान के लिए पैरोल मांगेंगे। उसके बाद वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में पहुंच पाएंगे। इस मसले पर शंका हो रही है। वजह पिछले लोकसभा चुनाव अभियान का घटनाक्रम है। वह अपने खुद के दल कौएद से घोसी संसदीय सीट से लड़ रहे थे। मऊ में ठेकेदार मन्ना सिंह व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में आगरा जेल में थे। हत्या के मामले की सुनवाई सीबीआई की दिल्ली कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने अपने प्रचार अभियान के लिए कोर्ट से पैरोल पर रिहा करने की मांग की। विशेष जज एके मेंहदीरत्ता ने उन्हें आठ दिन की पैरोल की मंजूरी दी। साथ ही आदेश दिया कि वह सीबीआई की कस्टडी में ही अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार करेंगे। उस वक्त भी सपा की सरकार थी। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। कोर्ट के आदेश के बावजूद पैरोल पर छोड़ने के लिए प्रशासन हिलाहवाली शुरू किया। पैरोल की अवधि घटने लगी। प्रशासन की मंशा समझ मुख्तार कोर्ट के आदेश की अवहेलना का मामला लेकर फिर कोर्ट गए। तब प्रशासन हरकत में आया। मुख्तार की ओर से पेशकश हुई कि हेलीकाप्टर से उन्हें घोसी संसदीय क्षेत्र पहुंचाया जाए। हेलीकाप्टर का खर्च वह खुद वहन करेंगे लेकिन आगरा प्रशासन हेलीकाप्टर का उनके प्रस्ताव नहीं माना। तय किया कि मुख्तार आगरा जेल से सड़क मार्ग से घोसी जाएंगे। वह दिन प्रचार अभियान का आखिरी दिन था। उनके लिए एक खटारा गाड़ी उपलब्ध कराई गई। मुख्तार उस गाड़ी पर सवार हुए। कानपुर तक पहुंचे ही थे कि प्रचार अभियान का आखिरी वक्त भी खत्म हो गया। उसके बाद मुख्तार को निकटवर्ती लखनऊ जेल पहुंचा दिया गया। इस बार भी लगभग सब कुछ वैसा ही है। मुख्तार को अपने प्रचार के लिए पैरोल चाहिए। प्रदेश में फिलहाल हुकूमत अखिलेश यादव की है। मुख्तार का परिवार अखिलेश यादव के खिलाफ लगातार जुबानी वाण दाग रहा है। पूर्व सांसद अफजाल अंसारी अखिलेश यादव को 'लल्लू' तक बता रहे हैं। ऐसे में हैरानी नहीं कि पैरोल पर मुख्तार अपने निर्वाचन क्षेत्र मऊ में वक्त पर शायद पहुंच पाएं। हालांकि मुख्तार के समर्थक इस उम्मीद में हैं कि कोर्ट उन्हें इस बार भी अपने पिछले आर्डर के आधार पर फिर पैरोल देगी।

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