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रायबरेली:- नामांकन के आखरी दिन नही दिखा राहुल और अखिलेश का गठजोड़_माधव सिंह की रिपोर्ट

रायबरेली_(माधव सिंह) रायबरेली में आज नामांकन का आखिरी दिन था ,जहां आज अलग-अलग विधानसभाओं से...

👤 Ajay6 Feb 2017 6:20 PM GMT
रायबरेली:- नामांकन के आखरी दिन नही दिखा राहुल और अखिलेश का गठजोड़_माधव सिंह की रिपोर्ट
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रायबरेली_(माधव सिंह) रायबरेली में आज नामांकन का आखिरी दिन था ,जहां आज अलग-अलग विधानसभाओं से प्रत्याशी के नामांकन करने आए थे / कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठजोड़ के प्रत्याशी वापस गए तो कहीं एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने के बावजूद एक ही विधानसभा से गठजोड़ के प्रत्याशी चुनाव के मैदान में उतर रहे हैं/ तो कहीं पर समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक ने राष्ट्रीय लोकदल पार्टी जैसे सीट से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है/
रायबरेली में सलोन विधानसभा से वर्तमान विधायिका आशा किशोर नामांकन करने आई थी लेकिन नामांकन कझ के अंदर नमांकन कर रही थी /की अचानक कहीं से एक फोन आता है और नामांकन ना करने का मन बना कर बाहर आती है/ इसके बाद जब मीडिया ने उनसे पूछा कि आपने नामांकन कर दिया तो वह बोली की मैंने नामांकन नहीं किया है/ मुझे अभी 10 मिनट पहले मुख्यमंत्री जी का फोन आया और उन्होंने मुझे कहा आप गठजोड़ का समर्थन कीजिए /इसलिए मैंने तुरंत वापस अपना पर्चा ले लिया, और अब मैं मुख्यमंत्री के बात को कांग्रेस प्रत्यासी के पझ को सहयोग करोगी और मैं उनके साथ हूं और उनको जिताने की पूरी कोशिश करूंगा जिससे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जीते और दुबारा मुख्यमंत्री बने / यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेश निर्मल जी है जो वह मैदान में चुनाव लड़ेंगे/

ऊंचाहार विधानसभा में नही दिखा राहुल और अखिलेश यादव का गठजोड़

रायबरेली ऊंचाहार विधानसभा से आज कांग्रेस के प्रत्याशी अजय पाल सिंह ने पर्चा दाखिल किया यहां से समाजवादी पार्टी के डॉक्टर मनोज पांडे जो कि वर्तमान में केबिनेट मंत्री भी हैं/ इन्होंने दो दिन पहले पर्चा दाखिल किया था /जब कांग्रेस प्रत्याशी अजय पाल से पूछा गया कि आपने गठजोड़ होने के बाद भी पर्चा दाखिल किया है तो उन्होंने कहा की यह मेरे हाईकमान का आदेश था /इसलिए मैंने यह पर्चा दाखिल किया अगर किसी कोई निर्णय लेना है तो शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कौन लड़ेगा कौन हटेगा यह तो 9 तारीख को पता चलेगा/और कौन हाईकमान की बात मानेगा और कौन नही या फिर अपने और अपनी जनता के बात पर चुनाव मैदान में जंग झेडेगा /

भगवान् के दरबार में हाजरी लगाने की मिली सजा / नही मिला टिकट का प्रसाद

रायबरेली के बछरावां विधानसभा से वर्तमान विधायक रामलाल अकेला ने आज राष्ट्रीय लोकदल पार्टी से नामांकन किया इसके दो दिन पहले उनके पुत्र विक्रांत अकेला ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया था /और वह आपस में समझा बुझाकर अपना पर्चा वापस ले लेंगे / लेकिन आज मीडिया ने जब विधायक से बात की तो वह समाजवादी पार्टी के विकास कार्यों को लेकर बताया कि मैंने पूरे विधानसभा क्षेत्र में काफी कुछ नहीं बहुत कुछ कार्य और विकास किया ,सड़क और पानी ,बिजली गांव गाँव पहुचाई है / लेकिन क्या कारण रहा कि मुझे पार्टी से टिकट नही दिया गया / उन्होंने ने बताया कि यहां मेरी एक गलती थी कि मैं मुलायम सिंह जी जिनको हम लोग भगवान मानते हैं, उन के दरबार में अगर हाजिरी लगाई थी तो क्या कारण रहा कि भगवान के पुत्र ने मुझे ना आशीर्वाद दिया ना प्रसाद दिया सीधे दरबार के बाहर ही खड़ा कर दिया अगर मैंने कोई गलती की है /तो मुझे कोई गुरेज नहीं है मिलायम सिंह यादव जी को मैं अपने दिल में रखता हूं रखूंगा हर वक्त रखता रहूंगा /और उनके साथ अभी भी हू / और मुलायम सिंह की ही देन है जो समाजवादी पार्टी आज इस मुकाम पर है, और आज मैं उनके कदमों पर पर उन्ही के कहे हुयी इस बात पर राष्ट्रीय लोकदल पार्टी जो की लोहिया की समर्थन और एक ही विचार धारा की बात करने वाली पार्टी है और इसलिए यह पार्टी बनाई गई थी और मैं इस पार्टी में चुनाव लडूंगा/

उन्होंने अजीत सिंह, चौधरी चरण सिंह, राम मनोहर लोहिया के नारे लगा रहे थे अचानक उनके मुंह से अखिलेश निकला लेकिन उन्होंने जिंदाबाद का नारा नही लगाया इसके बदले में अजीत सिंह जिंदाबाद का नारा लगाया / इसके बाद उन्होंने कहा की अखिलेश यादव मुख्यमंत्री जी का मैं सम्मान करता हू / लेकिन अब रायबरेली में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में हुए गठजोड़ का बागी तेवर का असर दिखने लगा है/ अभी कुछ प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, नामांकन करा चुके है लेकिन वह तो 9 तारीख को पता चलेगा जब नाम वापसी होगा /कौन गठजोड़ से आपस में लड़ेंगे या फिर किसका टिकट वापस होगा/

हमको क्या दिया है जबकि हमने आपको दिया है सरकारी ताज

रायबरेली वीआईपी जिला होने के बावजूद विकास को देखा जाए तो नाम मात्र का रहा है, हर बार नामांकन होता है, प्रत्याशी आते हैं विकास की बात करते हैं पर जब जनता से पूछा जाता है तो उनका कहना होता है /कि केवल चुनाव आते ही सड़को की रिपेयरिंग होती है थोड़ा बहुत विकास होता है लेकिन सबसे ज्यादा फायदा नेताओं के सगे लोगों को मिलता है/ उन्हीं क्षेत्रों का भला होता है गरीब की गलियां वैसे ही पांच साल तक सूनी बनी रहती है और वह अपने पानी बिजली सड़क के लिए एक कागज का अप्लीकेशन लेकर दर दर की ठोकरें खाता रहता है ,मोहल्लों में गांव में एक नल लगवाने के लिए सरकारी दफ्तर से लेकर मंत्री विधायक के द्वार के चक्कर लगाता रहता है आखिर में किसी के कहने पर अगर उसको कुछ मिल जाता है तो वह मन मैं कसौटी के रह जाता है मिला तो था पर मेरी मेहनत से नहीं मेरे वोट से नहीं किसी और के पैर छूकर मान-मनौव्वल मना करके यह नल, बिजली का खंबा मुझे किसी तरह मिल तो गया लेकिन कितने दिन बाद इस खंभे से लाइट की रौशनी चमकेगी और कितने दिन यह नल पानी देगा, क्योंकि आज के जमाने में ठेकेदारी पद्धति नेताओं से लेकर सरकार तक सरकारी कार्यालय तक पूरी तरह से संलिप्त हो गया है/ अभी कुछ दिन बाद लोकसभा का चुनाव भी आएगा और फिर वही नामांकन वोट और पैर छूने की प्रथा चालू हो जाएगी, पर जो भी है राजनीति तो समाज का एक अभिन्न अंग है जिसे आम जनता ही निभाती है निभाती रहेगी/ नेता करें विकास या ना करें जनता को अपना वोट देकर नेताओं को सरकार बनाने में मदद करते रहेंगे यही भारत की संविधान कहता है/