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मथुरा:- सैकड़ो साल परम्परा टूटी-वृन्दावन में विधवाओ ने खेली होली_धनीराम खंडेलवाल की रिपोर्ट

मथुरा:- ---ब्रज जहाँ की होली सबसे निराली है वहां इस बार अलग अंदाज में होली का आयोजन किया गया /...

👤 Ajay9 March 2017 1:22 PM GMT
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मथुरा:- ---ब्रज जहाँ की होली सबसे निराली है वहां इस बार अलग अंदाज में होली का आयोजन किया गया / बांकेबिहारी के धाम वृन्दावन में अबकी होली पर सैकड़ों साल पुरानी परंपरा की दीवार गिराकर एक नई शुरुआत की गयी । यहां आश्रय सदनों में रहने वाली विधवा महिलाएं प्रिय कन्हाई के साथ होली खेली ।जिससे उनके जीवन में इस नई परंपरा ने एक नई ऊर्जा भरने का काम किया ।श्रीधाम वृंदावन में वर्तमान में करीब 2000 विधवा महिला हैं। इनके जीवन दुख का सागर बन गया है। ऐसे में इन्हें कुछ नई अनुभूति कराने के लिए सुलभ इंटरनेशनल ने नई पहल को कदम बढ़ाया है। संगठन की ओर से चैतन्य विहार स्थित मीरा सहभागिनी आश्रय सदन में फूलों की होली का आयोजन किया गया । इसमें परंपरागत रूप से पहले रासलीला समारोह हुआ ।जिस मै सभी विधवाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया । वहीं उन्होंने होली के दौरान कान्हा पर रंग-बिरंगे फूल बरसाकर उन्हें होली रस से सराबोर कर देते है सुलभ इंटरनेशनल संस्था के अनुशार विधवाओं के जीवन में होने जा रहे इस बदलाव से वह बेहद खुश हैं। आखिर सदियों पुरानी प्रथा को दरकिनार कर वह इस बार होली खेली ।विधवाओं ने होली खेलने की अपनी इच्छा जब इनकी देखभाल कर रही संस्था सुलभ इंटरनेशनल के सामने जाहिर की तो संस्था के संस्थापक डॉ.बिंदेश्वरी पाठक ने सहमति जता दी। परंपरागत रासलीला कार्यक्रम के लिए संस्था की ओर से व्यापक तैयारी की गयी ।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुलभ इंटरनेशनल नामक संस्था आश्रय सदनों की विधवा-वृद्धाओं को बेहतर जिंदगी व्यतीत करने के लिए सुविधाएं प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है। ये विधवाएं मंदिरों में जाकर भीख न मांगें, इसके लिए कई प्रयास किये जा रहे है /इसी के तहत इस होली का आयोजन किया गया /कई वर्षों से अपनों का तिरस्कार और समाज की बेरुखी झेल रही इन महिलाओं में इस बार की भले ही इनके जख्म न भर पाए लेकिन इतना जरूर है की इनके जीवन में नयी उर्जा जरूर भर देगी /