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संतकबीरनगर:- शिक्षा जगत के महानायक,पूर्वांचल के मालवीय पंडित सूर्यनरायण चतुर्वेदी की महागाथा_यशवंत यादव की ख़ास रिपोर्ट

पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी ने अपनी दृढ इच्छा शक्ति से लिखी संघर्ष की अमर कथा ...

संतकबीरनगर:- शिक्षा जगत के महानायक,पूर्वांचल के मालवीय पंडित सूर्यनरायण चतुर्वेदी की महागाथा_यशवंत यादव की ख़ास रिपोर्ट
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पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी ने अपनी दृढ इच्छा शक्ति से लिखी संघर्ष की अमर कथा "जीवित वो रहेंगे, सदा जीवन भी रहेगा। शिक्षा का वो खुशियों भरा गुलशन भी रहेगा।। दादा ने अपने हाथ से, मुश्किल के वक्त मे जो दीप जलाया था, वो रौशन भी रहेगा" ।।




गरीबी और मुफलिसी की चुनौती को स्वीकार कर दृढ इच्छा शक्ति एवं कर्त्तव्यनिष्ठा की बदौलत पूर्वांचल मे अपनी अलग पहचान बनाने वाले योद्धा ने बड़ी खामोशी के साथ दुनिया छोड़ दिया। समाज को नई दिशा देने और युवा पीढ़ी के सपनो को पंख लगा कर उनके सपनो को साकार करने की जो आधारशिला तैयार करने मे संघर्ष की एक बड़ी दास्तान छिपी हुई है । सन् 1950 ई मे संतकबीरनगर (तब बस्ती) जिले के महुली थाना क्षेत्र के ग्राम भिटहा मे पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम पं अंबिका प्रताप नारायण चतुर्वेदी व माता का नाम श्रीमती चन्द्रकली देवी था। पांच बर्ष की उम्र मे ही पिता का देहावसान हो गया। बड़े भाई वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी और गोमती प्रसाद चतुर्वेदी सरंक्षण और मां के आंचल की छांव मे पले बढे पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी समय से पहले ही परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियो को लेकर चिंतित रहने लगे। स्नातक की शिक्षा हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय खखलीलाबाद से पूरी करने के बाद परास्नातक की शिक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय से पूरी किया। श्री चतुर्वेदी ने बीएड की पढाई रतन सेन डिग्री कालेज बान्सी से किया। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चो को शिक्षा से वंचित होता देख 30 बर्ष की उम्र मे ही उन्होंने 1980 मे परवतवा मे बाबा पर्वतनाथ इण्टर कालेज की स्थापना किया। धीरे धीरे शिक्षा के क्षेत्र मे शुरू हुआ ये कारवां आगे बढता गया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र मे कदम रखते हुए बर्ष 2002-03 मे पं अंबिका प्रताप नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय डुमरी की स्थापना किया। इसके बाद पं चतुर्वेदी ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा। तकनिकी शिक्षा को बढावा देने के लिए कई आईटीआई कालेज स्थापित करने के बाद व्यवसायिक शिक्षा के लिए बीएड, बीटीसी और बीपीएड कालेजो की भी स्थापना किया। वर्तमान समय इन संस्थानो मे पूर्वांचल के युवाओ के लिए 1500 से अधिक बीएड, 1500 से अधिक बीटीसी और लगभग 200 बीपीएड सीटो की व्यवस्था किया।

संतकबीरनगर जिले मे शैक्षणिक क्रान्ति लाने के बाद पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी ने बस्ती जिले मे शिक्षा का संजाल बिछाने का संकल्प लिया- अपनी क्षमताओ और संसाधनो से अपनी मातृभूमि को अभिसिन्चित करने की निष्ठा के तहत बर्ष 2007 मे बस्ती जिले जामडीह मे जीएस पीजी कालेज की स्थापना किया। धीरे धीरे बस्ती जिले मे एक दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थान संचालित हो चुके है। अंतिम सांस लेने तक तीन दर्जन से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानो की स्थापना करके पूर्वांचल मे शिक्षा की ज्योति जला कर यहां के मालवीय कहे जाने लगे। इन्सर्ट दो पुत्र और तीन पुत्रिया छोड़ गये 68 बर्षीय दिवंगत पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये है। परिवार को एक साथ लेकर चलने की इनकी सोच अंतिम समय तक कामयाब रही। तीन भाईयो सबसे बड़े वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी, गोमती चतुर्वेदी के बाद सूर्य नारायण चतुर्वेदी परिवार मे सबसे छोटे भाई थे। बड़े भाई और उनका परिवार दिल्ली मे कारोबार करने लगे। गोमती चतुर्वेदी रिटायर्ड डाककर्मी है।उनके बड़े बेटे डा उदय प्रताप चतुर्वेदी सूर्या इन्टरनेशनल एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर है तो छोटे बेटे अजय प्रताप नारायण उर्फ राकेश चतुर्वेदी नाथनगर मे स्थित एसआर इन्टरनेशनल एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर है। तीन पुत्रियां संध्या, कंचन और कुमकुम शादी के बाद अपनी ससुराल मे परिषदीय विद्यालयो मे शिक्षिका है। बड़ी बहू सविता चतुर्वेदी शिक्षण संस्थान के संचालन मे अपने पति का हाथ बंटाती है तो छोटी बहू शिखा चतुर्वेदी भी परिषदीय विद्यालय मे शिक्षिका है।

भतीजे जय चौबे और बेटे राकेश को राजनीति मे किया स्थापित

पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी ने शिक्षण संस्थानो की स्थापना के साथ ही राजनीति मे भी अपनी धमक दिखाई। भतीजे दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे को राजनीति के क्षेत्र मे प्रेरित करते हुए पहले उन्हे बर्ष 2000 मे जिला पंचायत सदस्य और बाद मे जिला पंचायत का उपाध्यक्ष बनवाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । बर्ष 2006 मे पूर्व सांसद और दिग्गज नेता रहे धनुषधारी पाण्डेय के पुत्र टुनटुन पाण्डेय को बुरी तरह पराजित करते हुए जिले के राजनीति का उभरता हुआ सितारा बनाया। बर्ष 2017 के चुनाव मे खलीलाबाद सदर विधानसभा से विधायक बनवा कर अपनी राजनैतिक ताकत का भी अहसास कराया। अपने छोटे बेटे अजय प्रताप नारायण उर्फ राकेश चतुर्वेदी को नाथनगर ब्लाक जैसे राजनैतिक अखाड़े का निर्विरोध ब्लाक प्रमुख बनाने के बाद बस्ती लोकसभा सीट का भाजपा से टिकट का प्रबल दावेदार बना दिया है। अपने मृदुभाषी और सहयोगात्मक रवैये के चलते सर्व समाज मे उनकी छवि अंत तक पूज्यनीय रही।