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बिलोहा बनकसिया में निखिल, नंदिनी, सुनीता व हरिवंश का हुआ अन्नप्राशन_रिपोर्ट-रवि गुप्ता

-हेल्दी बेबी शो कर स्वस्थ्य बच्चों की माताओं को किया गया पुरस्कृत-माताओं को 6 माह पूरे कर चुके...

बिलोहा बनकसिया में निखिल, नंदिनी, सुनीता व हरिवंश का हुआ अन्नप्राशन_रिपोर्ट-रवि गुप्ता
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-हेल्दी बेबी शो कर स्वस्थ्य बच्चों की माताओं को किया गया पुरस्कृत

-माताओं को 6 माह पूरे कर चुके बच्चों को कटोरी चम्मच से आहार देने का बताया महत्व

बलरामपुर 21 सितम्बर। बच्चे के सही पोषण के बारे में जागरूकता के लिए जिले के सभी 1882 आंगनवाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया जिसमें बच्चा 6 माह की आयु पूरी होने पर पहली बार अन्न चखता है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चे को सही समय से पूरक आहार की शुरूआत कराना होता है। क्यूंकि 6 माह तक बच्चा सिर्फ माँ का दूध पीता है। इस अवसर पर माँ व परिवार को माँ के दूध के साथ अर्द्ध ठोस व ठोस आहार के बारे में जागरूक किया जाता है।

शनिवार को सीडीपीओ गरिमा श्रीवास्तव ने बताया कि गैसड़ी ब्लाक के 218 आंगनवाड़ी केन्द्रों पर समारोह पूर्वक अन्नप्राशन दिवस मनाया गया। बिलोहा बनकसिया आंगनबाड़ी केन्द्र पर जिला पोषण विशेषज्ञ सीमा शुक्ला के साथ उन्होने आयोजित कार्यक्रम में शिरकत कर 6 माह पूरे कर चुके चार बच्चों निखिल, नंदिनी, सुनीता व हरिवंश का अन्नप्राशन संस्कार किया। बच्चों को पोषण की पूर्ति के लिए पोषाहार का वितरण भी किया गया। सीमा शुक्ला ने बताया कि जिन माताओं ने अपने बच्चे को 6 माह तक केवल स्तनपान तथा 6 माह बाद ऊपरी आहार देना शुरू कर दिया व हर माह बच्चों का वजन कराने के बाद बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं, उनमें से 7 माह के बच्चों के वजन के आधार पर तीन माताओं का चयन किया गया और इच्छा की मां उर्मिला प्रथम, हिमांशु की मां मैनावती द्वितीय व शुभी की मां महरानी को तृतीय पुरस्कार सीडीपीओ व जिला पोषण विशेषज्ञ द्वारा प्रदान किया। उन्होने बताया कि माताओं को पुरस्कार देने के अभिनव प्रयोग की शुरूआत इसलिए की गई है क्योंकि उससे माताओं में अपने बच्चों के पोषण के प्रति प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बच्चों की क्षमताओं का तेजी से विकास होगा। सीडीपीओ गरिमा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में मौजूद माताओं को चार्ट के माध्यम से बताया कि गुलाबी रंग का चार्ट लड़कियों में कुपोषण की स्थिति को बताता है और नीले रंग का चार्ट लड़कों में कुपोषण की स्थिति को बताता है उन्होने कुपोषण के हरे, पीला व लाल श्रेणी में क्या अंतर होता है, इसकी विस्तृत जानकारी भी माताओं की दी। इससे पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरिता भारती ने सभी माताओं को सही से हैण्डवाश करने का तरीका बताया। कार्यक्रम के दौरान रीता देवी व दीपाली सहित तमाम महिलाएं मौजूद रहीं।

छः माह के बच्चे को कटोरी चम्मच से दे आहार

-स्तनपान के साथ-साथ 6-8 माह की आयु के बच्चों को 250-250 मिली की आधी-आधी कटोरी अर्द्धठोस आहार, दिन में 2 बार देना चाहिए। 9-11 माह के बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ 250-250 मिली की आधी-आधी कटोरी दिन में तीन बार देनी चाहिए। 11-23 माह के बच्चे को भी स्तनपान के साथ 250-250 मिली की पूरी कटोरी दिन में तीन बार देनी चाहिये और साथ में 1-2 बार नाश्ता भी खिलाना चाहिए। बच्चे को तरल आहार न देकर अर्द्ध ठोस पदार्थ देने चाहिए।

भोजन में चार रंगों को करें शामिल

-भोजन में चतुरंगी आहार (लाल, सफेद, हरा व पीला) जैसे गाढ़ी दाल, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ स्थानीय मौसमी फल और दूध व दूध से बने उत्पादों को बच्चों को खिलाना चाहिए। इनमें भोजन में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व जरूर होने चाहिए, जैसे- कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज पदार्थ, रेशे और पानी उपस्थित हों।