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स्तनपान और ऊपरी आहार, बच्चों के पोषण का सही आधार_रिपोर्ट-रवि गुप्ता

-जिला पोषण विशेषज्ञ व बाल विकास परियोजना अधिकारी ने निरीक्षण कर जानीं हकीकत- बच्चे को 6 माह तक...

स्तनपान और ऊपरी आहार, बच्चों के पोषण का सही आधार_रिपोर्ट-रवि गुप्ता
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-जिला पोषण विशेषज्ञ व बाल विकास परियोजना अधिकारी ने निरीक्षण कर जानीं हकीकत

- बच्चे को 6 माह तक सिर्फ स्तनपान, बाद में पर्याप्त मात्रा में तरह तरह के पौष्टिक आहार

बलरामपुर 19 सितम्बर। पोषण माह में जन्म के बाद बच्चों को पोषण के लिए दिये जा रहे आहार की निगरानी के लिए जिला पोषण विशेषज्ञ और बाल विकास परियोजना अधिकारी ने संयुक्त रूप से सुपोषित गांव सोनपुर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान माताओं को उनके व बच्चों के सही पोषण की जानकारी दी गई।

गुरूवार को जिला पोषण विशेषज्ञ सीमा शुक्ला और बाल विकास परियोजना अधिकारी गरिमा श्रीवास्तव ने गैसड़ी ब्लाक कव सोनपुर गांव में जाकर महिलाओं की भ्रांतियों को दूर कर बच्चे के सही पोषण के लिए सही तरीके से स्तनपान कराने और ऊपरी आहार देेने की जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान पता चला कि गांव में रहने वाली ममता को नहीं पता था कि बच्चे को 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराना है। ममता अपने डेढ़ माह के बच्चे को सही पोषण नहीं दे पा रही और सही पोषण के लिए अपने खान पान पर भी ध्यान नहीं दे रही थी। उसे भ्रांति थी की स्तनपान के दौरान दूध खत्म हो जाने के बाद बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहिए। टीम ने ममता की भ्रांति को दूर करते हुए बताया कि बच्चे के सही पोषण के लिए मां को भी अपने पोषण युक्त खाद्य पदार्थो को नियमित खाने पर ध्यान देना चाहिए जिससे बच्चे को भी स्तनपान के जरिए पौष्टिक आहार मिल सके। इसी तरह सोनी अपने 7 माह के बच्चे को दो दिन से ऊपरी आहार नहीं दे रही थी उसका कहना था कि बच्चा बुखार के दौरान स्तनपान के अलावा कुछ भी नहीं खाएगा। जब सीडीपीओ गरिमा ने सोनी को समझाते हुए घर में बने दाल, चावल और आलू को एक कटोरे में मिलाकर बच्चे को दिया तो बच्चे ने पूरी कटोरी भोजन को खा लिया। टीम ने सोनी को समझाया कि बच्चे को हर हाल में स्तनपान कव साथ साथ निर्धारित मात्रा में ऊपरी आहार देना चाहिए। ऐसा ना करने पर बच्चा कुपोषित हो सकता है।

जीवन के पहले सुनहरे 1000 दिन

-सीडीपीओ गरिमा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्भावस्था से लेकर 1000 दिन मां और बच्चे के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इन दिनों में बच्चे का तेजी से शारीरिक और मानसिक विकास होता है। गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म से 2 साल की उम्र तक की अवधि शामिल होती है। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल तथा सही देखभाल बच्चे का पूरा विकास करने में मदद करती है। इस समय मां और बच्चे को सही पोषण और खास देखभाल की जरूरत होती है।

बच्चे को मिले पौष्टिक आहार, तभी बनेगी बात

-जिला पोषण विशेषज्ञ सीमा शुक्ला ने बताया कि बच्चे को 6 माह का होने तक सिर्फ स्तनपान और बच्चे के 6 माह की आयु पूरी होने बाद पर्याप्त मात्रा में तरह तरह के आहार अवश्य खिलाना चाहिए। एक खाद्य पदार्थ से शुरू करना चाहिए और धीरे धीरे खाने में विविधता लानी चाहिए। उन्होने बताया कि बच्चों की स्वाद इंद्रियां 6 से 9 माह के बीच विकसित होतीं हैं। इस उम्र में रोटी, चावल, काले व पीले रंग की दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पीले फल बच्चे को खिलाना चाहिए। यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस व मछली खिलाना चाहिए। खाने में दूध, दूध से बने पदार्थ और अखरोट शामिल करना चाहिए और आंगनवाड़ी से मिलने वाला पोषाहार भी जरूर खिलाना चाहिए। बच्चे के खाने में ऊपर से एक चम्मच घी, तेल या मक्खन मिलाएं और नमक, चीनी और मसाला कम डालना चाहिए। बच्चे को बाजार कोई भी पैकेट खाद्य पदार्थ नहीं खिलाना चाहिए इससे बच्चे को सही पोषण नहीं मिल पाता है।