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संतकबीरनगर:- दिल की धड़कनो को बढा देने वाली मतो की गणना वाली रात _वरिष्ठ पत्रकार जे पी ओझा का चिंतन_सत्यमेव जयते लाइव टीम

संतकबीरनगर:- गजब का चुनाव था भाई। कल वोट गिने जाएंगे लेकिन अब तक किसी के खेमें में आश्वस्ति का भाव...

👤 Ajay2017-03-10 16:22:11.0
संतकबीरनगर:- दिल की धड़कनो को बढा देने वाली मतो की गणना वाली रात _वरिष्ठ पत्रकार जे पी ओझा का चिंतन_सत्यमेव जयते लाइव टीम
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संतकबीरनगर:- गजब का चुनाव था भाई। कल वोट गिने जाएंगे लेकिन अब तक किसी के खेमें में आश्वस्ति का भाव नहीं। इसके बावजूद यह चुनाव कुछ बातों के लिए बेहद फैसलाकुन होने वाला है। इस बार के चुनाव में मतदाता अलग अलग खांचों में पहली बार बिखरे। सपा को मुस्लिम समाज के बड़ों का वोट सबसे ज्यादा मिला तो इस समाज के पिछड़े वोटरों की खामोशी अंत तक कायम रही। पूर्वी उत्तर प्रदेश में पीस पार्टी और एमआईएम ने इन वोटरों का मजबूत हिस्सा समेटा तो बसपा भी कहीं कहीं फायदे में रही। लेकिन वोट बिखरने का नुकसान तमाम दलों को हुआ। पिछले विधान सभा चुनाव में सपा को सभी पिछड़ों का तगड़ा समर्थन रहा लेकिन इस बार इस वर्ग नें सपा पर भरोसा नहीं जताया। १७ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का खेल बैकफायर कर गया और अन्य पिछड़े वर्ग का बड़ा वोट भाजपा ई बना नजर आया। नतीजे भी इस बार बेहद फैसलाकुन होने वाले हैं। सपा और बसपा में से जो भी तीसरे पर खिसका, उसके मूल वोट बैंक को झटका लगना तय है। सपा कांग्रेस गठबंधन से इन्ही दोनों दलों को नुकसान के आसार हैं। प्रदेश की उन १०५ सीटों पर, जहां कांग्रेस उम्मीदवार लड़े वहां मजबूत संदेश है कि यादवों का एक तगड़ा खेमा भाजपा की ओर मुड़ गया। जिन सीटों पर कांग्रेस नहीं लड़ी वहां का मूल कांग्रेसी वोट छितरा गया। कई जगहों पर यह वोट बसपा को ही मिल गए। बात करें नतीजों के बा द के परिदृश्य की तो सपा बसपा में से जो भी तीसरे पर सरका उसका पराभव तेज हो जाएगा। खास कर बसपा अगर तीसरे पर रह कर ज्यादा पिछड़ी तो उसके मूल वोट बैंक के मनोबल पर घातक असर तय है। लोकसभा के बाद इस चुनाव में बसपा को सत्ता का दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अगर बसपा तीसरे पर सरकी तो हाथी मोह पर गंभीर असर तय है। लेकिन अगर सपा तीसरे पर गई तो इसका पूरा ठीकरा अखिलेश के माथे फूटना तय है। जो आज अखिलेश जी की जल्दबाजी पर चुप हैं वही हार का कारण मुलायम की बेइज्जती को बताने से नहीं चूकेंगे। कांग्रेस की सीेटें घटीं तो पप्पू के नेतृत्व पर आखिरी और निर्णायक चोट के साथ प्रियंका वाड्रा को गांधी टाइटिल के साथ कांग्रेस नेतृत्व की ओऱ लाने की कोशिशें और तेज हो जाएंगी। नतीजा जो भी हो, जीते हारे कोई भी लेकिन कांग्रेस, सपा को नुकसान और बसपा की चुनौती कठिन होती तो अभी से दिखने लगी है।