Home » चुनावी चर्चा » बलिया :- मतदान के बाद अलसाई सुबह से ही उम्मीदों की आस- चुनावी समर पर जीत-हार की समीक्षा कर रहे मुकेश मिश्र_संवाददाता-सत्यमेव जयते लाइव

बलिया :- मतदान के बाद अलसाई सुबह से ही उम्मीदों की आस- चुनावी समर पर जीत-हार की समीक्षा कर रहे मुकेश मिश्र_संवाददाता-सत्यमेव जयते लाइव

बलिया:- पहले भी तीन मंत्री बलिया में रहे यही नही पूर्व प्रधान मंत्री चन्द्रशेखर , जयप्रकाश नरायण...

👤 Ajay2017-03-05 12:53:28.0
बलिया :-  मतदान के बाद अलसाई सुबह से ही उम्मीदों की आस- चुनावी समर पर जीत-हार की समीक्षा कर रहे मुकेश मिश्र_संवाददाता-सत्यमेव जयते लाइव
Share Post


बलिया:- पहले भी तीन मंत्री बलिया में रहे यही नही पूर्व प्रधान मंत्री चन्द्रशेखर , जयप्रकाश नरायण जी रहे जो बलिया पूर्ववंचल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम योग दान रहा है । विधानसभा क्षेत्र में कहाँ किसका अधिक किसका कम वोट पड रहा है? कहीं कोई विवाद तो नहीं हुआ?कही पुलिस ने लाठी भांजी क्या?बूथों कैप्चरिग की जुगत लगी की नही?फर्जी वोटिंग का जुगाड़ बन पाया कि नहीं?कहाँ कितना वोट पडा और किसकी जीत की सम्भावना बन रही है? जैसे दिन भर के उबाऊ सवालों व उनके जवाबों के माथापच्ची के बाद थका द्वाबा शनिवार की रात गहरी नींद मे सोया। रविवार की अंसारी सुबह के साथ बलिया ताजगी के साथ जाग गया। पूरे विधानसभा क्षेत्र मे इस बार के चुनाव मे पूर्व के चुनावों की तरह कहीं भी सिरफुटौव्वल,मारामरी,पुलिस की लाठी,मतदानकेन्द्र से पकड कर थाने लेजाकर दिनभर बैठाने,बूथकैप्चरिग, फर्जीवोटिग आदि घटना व कार्यवाही कही नही हुयी। यह यहाँ के लिये अभूतपूर्व सुखद घटना जैसा रहा। सुबह-सुबह द्वाबा में अगर आश्चर्य और खुशी की बात रही तो यही रही। यह प्रेरणा भर दी कि पार्टी व नेता का चक्कर छोडो।अब जमाना बदल गया है। सिर्फ और सिर्फ अपने भले की बात सोचो। सम्भवतः यही प्रेरणा लोगो मे गहरे तक उतरी और लगे हाथ लोगों इसे आजमाया भी। यहा तनाव रहित पूरी तरह खुशनुमा माहौल मे मतदान हुआ। अलबत्ता रविवार का सूरज नई उम्मीदों की रौशनी लेकर उगा। गाँव,गली,बाजार,चौपाल,चट्टी,


चौराहा सब जगह कौन जीत सकता है, कौन हार रहा है कि अलख रही। सब अपने चहेते के पक्ष मे अपने अकाट्य तर्क देते दिखे। यद्यपि सारे प्रत्याशियों के कर्म व चरित्र का फल इवीएम में बन्द है। जनता ने तो अपना निर्णय कर दिया है। 11मार्च के पहले कुछ भी कहने का कोई अर्थ ही नही बनता। रुक्का किसी का सही तो किसी का गलत हो सकता है। इस बार सोच समझ कर उम्मीदों के साथ बिना राग द्वेष के उम्मीदों के साथ मतदान किया है।उनकी उम्मीदों मे थाना,चौकी,तहसील,ब्लाकों, अस्पताल मे व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म कराने वाले,शिक्षा,सार्वजनिक वितरण को दुरुस्त करने वाले किसानो की समस्याओं सडक बिजली पानी यातायात व्यवस्था अच्छा करने वाले बाढ कटान व आग की घटनाओं से होने वाले नुकसानों को कम कराने वाले तथा हर खुशी दु:ख आपदा विपदा मे साथ खडे होने वाले रहनुमा की तस्वीर ही उभर रही है।