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संतकबीरनगर :- कौन किस पर पड़ रहा है भारी-चुनाव समीक्षा_जे पी ओझा की कलम से

संतकबीरनगर:- पांचवे दौर का चुनाव खत्म हुआ। अपने जिले में मतदान का प्रतिशत अपेच्छा से कम रहा। कम...

👤 Ajay2017-02-28 08:37:42.0
संतकबीरनगर :- कौन किस पर पड़ रहा है भारी-चुनाव समीक्षा_जे पी ओझा की कलम से
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संतकबीरनगर:- पांचवे दौर का चुनाव खत्म हुआ। अपने जिले में मतदान का प्रतिशत अपेच्छा से कम रहा। कम मतदान की एक संभावना तो यह हो सकती है कि विभिन्न कारणों से मतदाताओं में उत्साह का अभाव रहा। सबसे कम ५३ फीसदी मतदान मेंहदावल में रहा। माना जा सकता है कि मेंहदावल में कम वोटों के पीछे मतदाताओं की उदासीनता रही। खलीलाबाद में सपा प्रत्याशी के कमजोर होने की चरचा का भी ( ५३ के. लगभग प्रतिशत ) कम मतदान में बड़ा योगदान रहा माना जा रहा है। हां धनघटा में जरूर जिले का सर्वाधिक मतदान हुआ। धनघटा में जिस तरह पूर्व सांसद भालचंद यादव ने अपनी पूरी ताकत झोक दी और यादव मतदाता जिस तरह से आगे आए उससे यह साफ दिखता है कि यहां चार दिन पहले तक तीसरे स्थान पर आंकी जा रही सपा आखिरी मौके पर मुख्य लड़ाई में आ खड़ी हुई। बात करें तीनो सीटों पर जीत हार की संभावना पर तो सपा जिले की खलीलाबाद और मेंहदावल में खतरे में है। हां धनघटा में उसने जरूर बसपा को धर लिया और इसके पीछे मुस्लिम मतों का सपा के साथ तेजी से जुड़ना माना जा रहा है। मतदान के चार दिन पहले तक बसपा को चाहने वाले तमाम वोटर भालचंद यादव के सम्मान बचाने की गुहार पर उनके साथ सपा के खेमें में जुड़े उसी से नजारा बदला है। प्रमुख राममिलन यादव, जिला पंचायत सदस्य बलिराम यादव, पूर्व प्रमुख हैंसर राम अशीष यादव, जिला पंचायत सदस्य जुबेर अहमद जैसे तमाम लोगों ने खास कर हैंसर और पौली में सपाइयों को एक होकर जूझने की हिम्मत दी उससे धनघटा में सपा ने दुतरफा लड़ाई ला दी। उलझन में फंसे मुस्लिमों ने भी अंत में सपा के खेमें को ज्यादा मजबूती दी। ऐसे में धनघटा में सपा और भाजपा के बीच लड़ाई आंकी जा रही है। यहां जिस तरह अति पिछड़े मतदाताओं ने भाजपा को स्वीकार किया और बहुसंख्य बेलदार मत भाजपा के खाते में आंके जा रहे हैं उससे भाजपा थोड़ी बीस दिख रही है। खलीलाबाद में सपा प्रत्याशी के कमजोर होने से तमाम यादव मतदाताओं ने भाजपा को ताकत देती यह चरचा अगर सच है तो भाजपा इस बार बीस होती नजर आ रही है। हां तमाम खांटी सपाई भी इस बार बसपा के साथ कंधा मिलाते नजर आए। बनियाबारी बूथ पर सपा से ब्लाक प्रमुख का टिकट न पाने से खफा बृजभूषण पांडे, विश्वनाथपुर में प्रबल संतराम यादव जैसे लोग गंवई राजनीति के चक्कर में बसपाई होते साफ दिखे। बात मेंहदावल की करें तो वहां बसपा, भाजपा और एमआईएम से तीखा मुकाबला रहा। सपा ने सीएम के दौरे से जो फिजा बनाई थी मुस्लिमों के दुविधा में पड़ जाने से तस्वीर साफ नहीं हो पा रही हैं। अनिल त्रिपाठी को कितने ब्राहमण और मुस्लिम वोट मिले यह सवाल ईवीएम के पेट में समा गया है। बहुसंख्य मुस्लिम वोट एमआईएम, पीस पार्टी और सपा के बीच बंटा यह तय माना जा रहा है। यहां भी संघर्ष बेहद कांटे का है। अंदाजा दो भाजपा एक बसपा का है। वैसे कुछ लोग तीनों सीटों पर भाजपा को सबसे आगे आंक रहे हैं। यह तो तय है कि तीनो सीटों पर भाजपा ने सर्वाधिक फ्लोटिंग वोट बटोरे हैं।