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संतकबीरनगर:- चुनावी माहौल के सन्दर्भ में वरिष्ठ पत्रकार जे पी ओझा का सटीक विश्लेषण_सत्यमेव जयते लाइव न्यूज़

संतकबीरनगर :- गजब का चुनाव है भाई। सारे भाजपा विरोधी सीधे मोदी जी पर हमलावर होकर भी सुरक्षा की...

👤 Ajay2017-02-23 12:06:33.0
संतकबीरनगर:- चुनावी माहौल के सन्दर्भ में वरिष्ठ पत्रकार जे पी ओझा का सटीक विश्लेषण_सत्यमेव जयते लाइव न्यूज़
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संतकबीरनगर :- गजब का चुनाव है भाई। सारे भाजपा विरोधी सीधे मोदी जी पर हमलावर होकर भी सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं। यह पहली बार है कि सारे गैर भाजपाइयों में अब तक कारगर साबित हो रहे डर के कारोबार के फेल हो जाने का डर साफ दिखने लगा है।
हर बार एक होकर भेड़िया ( भाजपा ) आएगा, तुमको खा जाएगा का अक्सीर नुक्सा इस बार कामयाब होता नहीं आ रहा है। अब तक सत्ता के लिए सब कुछ करने वाले, सबसे हाथ मिला लेने वाले गैर भाजपाइयों में सबसे बड़ी बेचैनी जातिवादी गणित के फेल होते नजर आने की है। सपा की ताकत रहा माई समीकरण दरक गया है और पिछड़ों की गोलबंदी का नारा हकीकत खुल जाने से बेनूर होता दिखने लगा है। १७ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का लोला भी बेदम हो रहा है तो इन जातियों को दुबारा यही नाटक फेल हो जाने से एक बात पूरी तरह समझ में आने लगी है कि समाजवाद का दूसरा मतलब मुलायम का परिवार वाद और यादव वाद भर है। जिस तरह तमाम सरकारी भर्तियों में एक खास छेत्र के लोगों को भरा गया उसने अन्य पिछड़ी जातियों के कान खड़े कर दिए हैं। दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में उज्जवला योजना का रसोई गैस का बिना भेदभाव का कनेक्शन भाजपा को मुस्लिम विरोधी बताने के प्रचार की हवा निकाल रहा है। बात करें गठबंधन की तो कांग्रेस के लिए यह गठबंधन बेहद घातक साबित होता नजर आ रहा है। जहां कांग्रेस के प्रत्याशी हैं वहां अधिकांश सपाई मत कांग्रेस के बदले छितरा रहे हैं तो जहां सपाई प्रत्याशी है वहां कांग्रेस मतों का यही हाल है।
बात करें बसपाई मुहिम की तो वहां भी गजब नजारा है।एक मुश्त मुस्लिम मतों के लिए ९९ मुस्लिम प्रत्याशी उतारने का उनका खेल भी खास रंग नहीं जमा पा रहा है। कहीं भी एकमुश्त मुस्लिम मत बसपा को नहीं मिलते दिख रहे हैं। इन सभी ९९ सीटों पर भी दलित मुस्लिम समीकरण पूरी तरह सेट नहीं हो पा रहा है। पिछले दो चुनावों में बसपा को दम बंधाने वाला ब्राहमण मतदाता इस बार पूरी तरह भाजपा के लिए मेंटर का काम करता दिख रहा है। एमआईएम और पीस पार्टी ने भी पूरे दम खम से ताल ठोक कर सपा और बसपा दोनो का खेल बिगाड़ रखा है। इसके अलावा तीन तलाक का मुद्दा मुस्लिम महिलाओं को अलग से लुभा रहा है।
इस विधान सभा चुनाव के नतीजे में अगर सपा या बसपा जीतती है तो धार्मिक और जातीय राजनीति का रंग और गाढ़ा होगा और अगर भाजपा की सरकार बनी तो नजारा बदलने का आगाज हो जाएगा। बसपा या सपा में से जो ज्यादा पिछड़ा उसकी राजनीतिक विदाई की राह भी हमवार होती दिखेगी यह आसार दिखने लगेगा।