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बलिया :- चुनाव बहिष्कार पर अड़ा गाँव प्रत्याशियों को दे रहा है खदेड़_मुकेश मिश्र की रिपोर्ट

बलिया जनपद के 363 बैरिया विधानसभा क्षेत्र में गंगापार नौरंगा गांव विधानसभा चुनाव बहिष्कार के लिए...

👤 Ajay2017-02-11 08:28:33.0
बलिया :- चुनाव बहिष्कार पर अड़ा गाँव प्रत्याशियों को दे रहा है खदेड़_मुकेश मिश्र की रिपोर्ट
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बलिया जनपद के 363 बैरिया विधानसभा क्षेत्र में गंगापार नौरंगा गांव विधानसभा चुनाव बहिष्कार के लिए अडा हुआ है। यहां के लोगों ने सपा के लिए जन संपर्क करने आए लोगों को गांव के बाहर से ही वापस लौटा दिया। वही अगले दिन भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह को भी कोई लिफ्ट नहीं दिया ।अलबत्ता सपा के लोगों से ग्रामीणों ने बेरुखी दिखाई। वही सुरेंद्र सिंह से यह अनुरोध कर वापस लौटा दिया कि आपको विकास कराने का मौका नहीं मिला है। हम आप पर नाराज तो नहीं हैं, पर आप हमारे इस अभियान में सहयोग दें। हमारे आंदोलन का मान रखें ।गांव के बाहर फेंकू बाबा स्थान व हरेराम ब्रह्मचारी जी के मंदिर पर मत्था टेककर भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह भी वापस लौट आए।
बैरिया विधानसभा क्षेत्र के बैरिया विकासखंड अंतर्गत गंगा पार के लगभग 25 हजार आबादी वाले नौरंगा ग्राम पंचायत के लोग मूलभूत सुविधाओं के मामले में ग्राम पंचायत की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए काफी पहले से ही विधानसभा चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर चुके हैं। अब वहां के ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव में जनसंपर्क के लिए आने वाले नेताओं को भी गांव में प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की है। इसके लिए ग्रामीण गांव में प्रवेश करने वाले स्थान पर फेकु बाबा उपासना स्थल पर पोस्टर बैनर लगा कर पूरे दिन डेरा जमा कर बैठ रहे हैं। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होते ही अपने गांव की समस्याओं को लेकर विचार विमर्श के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया ।जगह जगह पर पोस्टर लगाए, जिलाधिकारी के यहां जा कर ज्ञापन भी सौंपा है। इसी बीच 10 दिसंबर को जिला प्रशासन की तरफ से अधिकारियों का अमला गांव में पहुंचकर चौपाल लगाकर उनकी जो-जो मांग थी, उसमें से जो तत्काल पूरा किए जाने लायक है उसे चुनाव से पहले पूरा कराने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को मनाने की कोशिश की। तब ग्रामीणों ने कहा था कि ठीक है जो काम पूर काम पूरा होने लायक है वह अगर पूरा हो जाता है तो हम लोग मतदान करेंगे। अधिकारियों के जाने के बाद रास्तों को ठीक करने के कुछ काम शुरू तो हुआ। लेकिन वह पूरा नहीं किया गया। आधा अधूरा काम करके ही काम बंद हो गया। जिससे ग्रामीणों में और भी गुस्सा बढ़ा, और अब जनसंपर्क के लिए आने वाले नेताओं को भी गांव में प्रवेश करने से रोक लगा दिए हैं।