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संतकबीरनगर:- शूरू हो गयी नकल के नाम पर अवैध वसूली-कहीं चार हजार तो कहीं पांच से छ: हजार मांगा जा रहा सुविधा शुल्क _ मो.अदनान की रिपोर्ट

संतकबीरनगर:- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की कल से...

👤 Ajay15 March 2017 3:04 PM GMT
संतकबीरनगर:- शूरू हो गयी नकल के नाम पर अवैध वसूली-कहीं चार हजार तो कहीं पांच से छ: हजार मांगा जा रहा सुविधा शुल्क _ मो.अदनान की रिपोर्ट
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संतकबीरनगर:- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की कल से शुरू हो रही बोर्ड परीक्षा में अभी से नकल का खेल शूरू हो गया है और परीक्षा देने वाले बच्चों से सुविधाशुल्क के नाम पर अवैध वसूली शुरू हो गयी है । जानकारी के अनुसार सेमरियावां विकासखंड में परीक्षा केन्द्र बने लगभग आधा दर्जन वित्तविहीन विद्यालय नकल के नाम पर जमकर अवैध वसूली कर रहे हैं । और यह कार्य तो इन विद्यालयों द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है । लेकिन शिक्षा विभाग शिकायत के बावजूद कार्यवाही करने के बजाय खानापूरति तक सीमित रह जाता है । सच्चाई तो यह है कि शिक्षा विभाग कहीं न कहीं नकल के खेल में पूरी तरह से संलिप्त है और लेन-देन से यह नकल का खेल हर वर्ष अनवरत चलता रहता है । और विभाग के ही शह से शिक्षा माफियाओं की पौ बारह रहती है ।
हालत तो यह कुछ केन्द्र ऐसे हैं जहां सुविधाशुल्क न देने पर छात्रों को अलग बैठा दिया जाता है एवं लाठी -डंडे से धमकी देकर पैसों की वसूली की जाती है । पिछले वर्ष भी कई केन्द्रों से ऐसी सूचनाएँ मिली थी लेकिन विभाग की ओर से इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गयी थी ।हाईस्कूल के छात्रों से तीन से चार हजार एवं इंटरमीडिएट के छात्रों से चार से छ: हजार रूपया सुविधाशुल्क के नाम पर अभी से मांगा जा रहा है और जो छात्र पैसा देने में असमर्थ रहते हैं उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है ।
परीक्षा देने वाले छात्र चाहकर भी इसकी शिकायत कहीं नहीं कर पाते क्योंकि उनको डर रहता है कि कहीं उनकी उत्तर पुस्तिका को ही न बदल दिया जाये । विभाग के ढुलमुल रवैये के कारण शिक्षा माफिया परीक्षा की सुचिता को लगातार तार-तार कर रहे हैं और विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है ।अगर शासन द्वारा एक उच्च स्तरीय टीम गठित कर इसकी जांच की जाये तो कई बड़े लोग बेनकाब हो सकते हैं और शिक्षा के बाजारीकरण पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है ।
खैर लगता तो यही है हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह खेल चलता ही रहेगा और विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेगने वाली है ।नकल के इस खेल से कहीं न कहीं होनहार छात्र भी मानसिक रूप से परेशान रहते हैं ।खैर देखते हैं विभाग इन शिक्षा माफियाओं पर जांच कर कठिन कार्यवाही करता है या यह सुविधाशुल्क का खेल चलता ही रहेगा ।