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संतकबीरनगर:- जमीनी मुद्दों से भटके नेता और राजनैतिक दल शिक्षा व्यवस्था की क्यों नही करते बात - वरिष्ठ पत्रकार जे पी ओझा का चिंतन_सत्यमेव जयते लाइव

संतकबीरनगर:- चुनाव आखिरी चरण में हैं। सभी दलों का निशाना पीएम मोदी रहे तो मोदी सहित सबने बेवजह की...

👤 Ajay1 March 2017 1:59 PM GMT
संतकबीरनगर:- जमीनी मुद्दों से भटके नेता और राजनैतिक दल शिक्षा व्यवस्था की क्यों नही करते बात  - वरिष्ठ पत्रकार जे पी ओझा का चिंतन_सत्यमेव जयते लाइव
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संतकबीरनगर:- चुनाव आखिरी चरण में हैं। सभी दलों का निशाना पीएम मोदी रहे तो मोदी सहित सबने बेवजह की बहस चला कर जनता को भरमाने का काम किया। अब भी जमीनी मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हो पा रही हैं। आज दुनिया के सबसे बड़े मानें जाने वाले यूपी शिक्षा बोर्ड की दुर्गति की बात करें। कभी अपनी शिक्षा के लिए नामचीन रहे इस बोर्ड की हालत खस्ता है। एक एक कर तमाम कालेज सीबीएसई बोर्ड की शिक्षा प्रणाली की ओर सरकते जा रहे हैं। नए खुलने वाले अधिकांश माध्यमिक स्कूलों में बड़ी शान से सीबीएसई बोर्ड का नाम लिख कर प्रचार किया जाता है। लेकिन इलाहाबाद बोर्ड की हालत खस्ता क्यों है इस पर कोई चर्चा क्यों नहीं होती यह सवाल गूंगा क्यों बना है।
बात को आगे बढ़ाते हुए सवाल यह है कि आखिर यूपी शिक्षा बोर्ड की चर्चा परीक्षा काल में ही क्यों होती है। परीक्षा केंद्रो की नीलामी, परीक्षा में अच्छे नंबरों के लिए जबरदस्त वसूली की बातें किसी को चिंतित क्यों नहीं करतीं। अब तो हाल यह है कि इंजीनियरिंग, पालिटेक्निक, मेडिकल जैसे छेत्रों में भविष्य बनाने का सपना यूपी शिक्षा बोर्ड से पढ़ने वाले बच्चों के लिए बन ही नहीं पाता। तमाम या यूं कहें अधिकांश विज्ञानं वर्ग की पढाई करा रहे स्कूलों, कालेजों में कागजी लैब हैं जहां प्रेक्टिकल पढ़ाई की कोई चर्चा तक नहीं होती। अब तो हाल यह है कि प्रेक्टिकल
परीक्षा बिना दिए, बिना परीक्षक से मिले ही पैसा ले देकर कोरम पूरा करने की बात आम है। आज इन कालेजों में पढाई की गुणवत्ता कभी जांची ही नहीं जाती। अपने जिले में ही तमाम कालेज ऐसे हैं जहां पूरे साल न बच्चे दिखते हैं न कोई निगरान न अध्यापक। परीक्षा के ठीक पहले इन स्कूलों का ताला खुलता है और मार्कसीट बाट कर बंद हो जाता है। यह नजारा जिला मुख्यालय तक के तमाम स्कूल कालेजों में कभी भी देखा जा सकता है। नतीजा यह है कि उत्तरी प्रदेश के नामचीन रहे इस बोर्ड की पहचान मिटती जा रही है। लेकिन इस बात की फिक्र किसी को नहीं है। आखिर यह सवाल गूंगा क्यों बना है और सब बच्चों और देश के भविष्य पर पोती जा रही इस कालिख पर चुप क्यों हैं।