Home » ब्रेकिंग न्यूज़ » लखनऊ- UP के 28 बीजेपी सांसदों का इस बार कट सकता है टिकट_रिपोर्ट-शैलेश सिंह/देवेंद्र कुमार

लखनऊ- UP के 28 बीजेपी सांसदों का इस बार कट सकता है टिकट_रिपोर्ट-शैलेश सिंह/देवेंद्र कुमार

लखनऊ - बीजेपी के लिए मिशन 2019 का सफ़र काफी चुनौतियों भरा है ।उसमें सबसे बड़ी चुनौती टिकट बंटवारे को...

👤 Ajay13 March 2019 9:16 AM GMT
लखनऊ- UP के 28 बीजेपी सांसदों का इस बार कट सकता है टिकट_रिपोर्ट-शैलेश सिंह/देवेंद्र कुमार
Share Post


लखनऊ - बीजेपी के लिए मिशन 2019 का सफ़र काफी चुनौतियों भरा है ।उसमें सबसे बड़ी चुनौती टिकट बंटवारे को लेकर है । बीजेपी दो दर्जन से अधिक सांसदों का टिकट काटने की तैयारी कर चुकी है । इसकी एक्सरसाइज प्राथमिक तौर पर दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में हो चुकी है । होली से पहले 16 मार्च तक बीजेपी अपने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है । इसमें पहले चरण में जिन आठ लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होगा वे प्रत्याशी होंगे । साथ ही जिनका टिकट पहले से ही तय है उनका भी नाम होगा ।

दरअसल इस बार बीजेपी जीतने वाले प्रत्याशिय़ों पर ही अपना दांव लगाएगी । यही कारण है कि सांसदों की रिपोर्ट कार्ड तैयार की गई है, उसमें जातीय समीकरण और प्रत्याशी के रिपोर्ट कार्ड पर खास फोकस किया गया है ।

इन सांसदों का टिकट कट सकता है -

बलिया-भरत सिंह, सलेमपुर- रविंद्र कुशवाहा, कुशीनगर- राजेश पांडेय, भदोही- वीरेंद्र सिंह, राबर्ट्सगंज- छोटेलाल खैरवार, जौनपुर- कृष्णाप्रताप, मछलीशहर- रामचरित्र निषाद, - हरिनारायण राजभर, बस्ती- हरीश द्विवेदी, संतकबीरनगर- शरद त्रिपाठी, अकबरपुर -देवेंद्र सिंह, घोसी-हरिनारायण राजभर इलाहाबाद-श्यामाचरण गुप्ता, अंबेडकरनगर- हरिओम पांडेय, बहराइच- सावित्री बाई फूले, श्रावस्ती- दद्दन मिश्रा, हरदोई- अंशुल वर्मा, मिश्रिख- अंजू बाला, आंवला- धर्मेंद्र कश्यप, इटावा- अशोक दोहरे, फतेहपुर-निरंजन ज्योति, फतेहपुर सिकरी- चौधरी बाबूलाल, हमीरपुर- कुंवर पुष्पेंद्र सिंह, रामपुर- नैपाल सिंह, धौरहरा- रेखा वर्मा, संभल- सत्यपाल सिंह सैनी, मेरठ- राजेंद्र अग्रवाल, बाराबंकी- प्रियंका रावत, उन्नाव- साक्षी महराज.

ये संख्या बढ़ भी सकती है । इन सीटों पर अधिकांश ऐसे सांसद हैं जो कई बार अपनी ही पार्टी के सिद्धांतो को लेकर मुखर भी हुए हैं । बहराइच की बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने अब तो कांग्रेस का दामन भी थाम लिया है । दूसरी तरफ टिकट काटने का दूसरा कारण 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद जीत का आंकड़ा कम रहना जाना भी है । संभल के सांसद सत्यपाल सिंह सैनी की जीत मात्र पांच हजार से कुछ अधिक वोटों से हुई, वहीं रामपुर के सांसद नैपाल सिंह की जीत 23000 से और बस्ती से हरीश द्विवेदी की 33000 से कुछ अधिक वोटों से जीत हुई थी ।

ऐसे ही और नेताओं को भी कैटेगराइज किया गया है । दूसरी तरफ इन सीटों पर जातीय समीकरण और क्षेत्र में उनकी पकड़ और किए गए कामकाज को आधार माना गया है । वैसे पार्टी के नेता कहते हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है और कभी चुनाव लड़ने के लिए तो कभी लड़ाने के लिए कार्यकर्ता हमेशा तैयार रहते हैं ।

पार्टी के बड़े नेताओं के संसदीय क्षेत्र में बदलाव नहीं

पार्टी के बड़े नेताओं के संसदीय क्षेत्र में बदलाव नहीं करने का मन बना रही है । वैसे भी बीजेपी सबसे अंत में अपने प्रत्याशियों के नाम सामने लाने में विश्वास रखती है और इस बार भी तैयारी उसी तरह से चल रही है । जबकि दूसरे दल अपने प्रत्याशियों की घोषणा करने लगे हैं । बीजेपी का कहना है कि प्रत्याशी चयन एक प्रक्रिया है और बीजेपी उसी प्रकिया के तहत अपनी तैयारी कर रही है ।

बीजेपी एक बार फिर 'मोदी है तो मुमकिन है' के नारे के साथ मैदान में उतर रही है । ऐसे में स्थानीय प्रतिनिधियों से जनता की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और ये संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि जनता अगर अपने प्रतिनिधि से खुश नहीं है तो उन्हें बदल दिया जाएगा ।